पर्यावरण संरक्षण को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए National Green Tribunal (एनजीटी) ने Delhi Pollution Control Committee (डीपीसीसी) पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई वन एवं वन्यजीव विभाग को क्षतिपूर्ति शुल्क समय पर हस्तांतरित न करने के कारण की गई।
🌳 क्या है पूरा मामला?
मामला दिल्ली के Nilothi गांव से जुड़ा है, जहां अवैध रूप से पत्थर तोड़ने वाली इकाइयां संचालित हो रही थीं। इन इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए डीपीसीसी ने करीब 8 लाख रुपये का पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति शुल्क वसूला था।
एनजीटी के आदेश के अनुसार, यह राशि वन एवं वन्यजीव विभाग को स्थानांतरित की जानी थी, ताकि उसका उपयोग वृक्षारोपण और पर्यावरण सुधार कार्यों में किया जा सके।
लेकिन डीपीसीसी ने यह राशि लंबे समय तक संबंधित विभाग को ट्रांसफर नहीं की, जिससे पर्यावरणीय पुनर्स्थापन कार्य प्रभावित हुए।
⚖️ एनजीटी की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान एनजीटी ने डीपीसीसी द्वारा पेश किए गए स्पष्टीकरण को अस्वीकार कर दिया। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट कहा कि आदेशों का पालन समयबद्ध तरीके से होना चाहिए और किसी भी प्रकार की प्रशासनिक देरी को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
एनजीटी ने इसे अपने पूर्व आदेशों की अवहेलना मानते हुए 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया और भविष्य में ऐसी लापरवाही न दोहराने की चेतावनी दी।
🌱 पर्यावरणीय जवाबदेही पर जोर
ट्रिब्यूनल ने यह भी रेखांकित किया कि पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि पर्यावरण की भरपाई और सुधार सुनिश्चित करना है। यदि यह राशि समय पर संबंधित विभाग तक नहीं पहुंचेगी, तो वृक्षारोपण और पुनर्वास जैसे कार्यों में बाधा आएगी।

