यमुना एसटीपी में यूवी तकनीक अध्ययन पर एनजीटी का निर्देश, डीजेबी से मांगा हलफनामा
National Green Tribunal (NGT) ने दिल्ली जल बोर्ड (DJB) को निर्देश दिया है कि वह Indian Institute of Technology Delhi (IIT दिल्ली) द्वारा यमुना के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) में यूवी तकनीक के अध्ययन पर आई लागत को लेकर हलफनामा दाखिल करे।
जानकारी के अनुसार, IIT दिल्ली ने यमुना में प्रदूषण नियंत्रण और कीटाणुशोधन की प्रभावशीलता की जांच के लिए 14 एसटीपी में अध्ययन किया था। इस अध्ययन में यूवी (अल्ट्रावायलेट) तकनीक के उपयोग की व्यावहारिकता और उसकी प्रभावशीलता को परखा गया। इसके लिए लगभग 60.70 लाख रुपये की लागत बताई गई है।
NGT ने इस मामले में दिल्ली जल बोर्ड से यह स्पष्ट करने को कहा है कि यह खर्च किस आधार पर किया गया, इसकी प्रक्रिया क्या थी और क्या इसमें सभी आवश्यक नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया।
यमुना नदी में प्रदूषण एक गंभीर मुद्दा रहा है, और इस तरह के अध्ययन का उद्देश्य जल शोधन तकनीकों को बेहतर बनाकर नदी की सफाई में सुधार लाना है। यूवी तकनीक को पानी को कीटाणु मुक्त करने का एक प्रभावी तरीका माना जाता है, लेकिन इसकी व्यावहारिकता और लागत-प्रभावशीलता को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।
NGT के इस निर्देश को पर्यावरण संरक्षण और सरकारी खर्च की पारदर्शिता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब दिल्ली जल बोर्ड को तय समय के भीतर अपना हलफनामा दाखिल करना होगा, जिसके बाद आगे की सुनवाई में इस मामले पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
फिलहाल, इस मामले में सभी की नजर NGT की अगली सुनवाई पर टिकी हुई है, जो यमुना की सफाई और उससे जुड़े तकनीकी उपायों की दिशा तय कर सकती है।

