दिल्ली में बनेगा नया 10 किमी का मेट्रो कॉरिडोर, अंडरग्राउंड होंगे 4 स्टेशन; इंडिया गेट से भारत मंडपम तक आसान होगा सफर
दिल्ली में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार की दिशा में एक नए कॉरिडोर की योजना सामने आई है। करीब 10 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर सेंट्रल विस्टा मेट्रो लाइन का हिस्सा होगा। प्रस्तावित लाइन के तहत चार नए अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन बनाए जाने की योजना है। इससे सेंट्रल दिल्ली के प्रमुख इलाकों तक मेट्रो कनेक्टिविटी को बेहतर करने में मदद मिल सकती है।
प्रस्तावित कॉरिडोर में इंडिया गेट, वार मेमोरियल-हाईकोर्ट, बड़ौदा हाउस और भारत मंडपम स्टेशन शामिल होंगे। इस रूट का उद्देश्य सेंट्रल दिल्ली के महत्वपूर्ण सरकारी, पर्यटन और सार्वजनिक स्थलों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ना है।
चार अंडरग्राउंड स्टेशन होंगे
करीब 10 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर में सभी चार स्टेशन भूमिगत बनाए जाने की योजना है। इनमें इंडिया गेट स्टेशन, वार मेमोरियल-हाईकोर्ट स्टेशन, बड़ौदा हाउस स्टेशन और भारत मंडपम स्टेशन शामिल हैं।इंडिया गेट और आसपास के पर्यटन स्थलों पर आने वाले लोगों के लिए यह कनेक्टिविटी उपयोगी हो सकती है। वहीं वार मेमोरियल और दिल्ली हाईकोर्ट जैसे प्रमुख स्थानों तक पहुंच भी आसान होने की उम्मीद है।
सेंट्रल दिल्ली में कनेक्टिविटी बढ़ाने की योजना
सेंट्रल विस्टा क्षेत्र दिल्ली के सबसे महत्वपूर्ण इलाकों में शामिल है। यहां संसद भवन, सरकारी कार्यालयों, प्रमुख स्मारकों और बड़े आयोजन स्थलों की मौजूदगी है। ऐसे में प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर को इस क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने की योजना के तौर पर देखा जा रहा है।भारत मंडपम में सालभर विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम आयोजित होते हैं। मेट्रो स्टेशन बनने से कार्यक्रमों के दौरान यहां पहुंचने वाले लोगों को भी सार्वजनिक परिवहन का एक अतिरिक्त विकल्प मिल सकता है।
अंडरग्राउंड रूट से कम होगा सतह पर दबाव
पूरे कॉरिडोर को भूमिगत रखने की योजना का एक उद्देश्य सेंट्रल दिल्ली के संवेदनशील और महत्वपूर्ण क्षेत्र में सतह पर निर्माण का असर कम रखना भी है। भूमिगत मेट्रो के जरिए मौजूदा सड़क और सार्वजनिक स्थानों के उपयोग को प्रभावित किए बिना कनेक्टिविटी विकसित की जा सकती है।हालांकि, इस परियोजना की लागत, निर्माण की समयसीमा और काम शुरू होने की अंतिम तारीख जैसी जानकारियां आधिकारिक मंजूरी और परियोजना की प्रगति के साथ स्पष्ट होंगी। प्रस्तावित कॉरिडोर पूरा होने के बाद सेंट्रल दिल्ली के प्रमुख स्थलों के बीच मेट्रो से आवागमन का एक नया विकल्प उपलब्ध होगा।

