2021 सड़क हादसे में मारे गए फौजी के परिवार को MACT ने 69.61 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया
दिल्ली के मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) ने 2021 में हुए एक सड़क हादसे में ट्रक चालक और ट्रक के मालिक को दोषी मानते हुए मृतक 53 वर्षीय फौजी बाल किशन के परिवार को 69.61 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। साथ ही ट्रिब्यूनल ने बीमा कंपनी को यह राशि 9 प्रतिशत ब्याज के साथ जमा करने का निर्देश भी दिया है।
घटना 2021 में हुई थी, जब बाल किशन सड़क पर अपने वाहन से जा रहे थे। अचानक सामने से आए ट्रक के कारण गंभीर दुर्घटना हुई, जिसमें बाल किशन की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद उनके परिवार ने न्याय पाने के लिए MACT में दावा दाखिल किया।
ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में कहा कि ट्रक चालक और मालिक की लापरवाही और सुरक्षा नियमों का उल्लंघन सीधे इस हादसे का कारण बनी। दुर्घटना के कारण परिवार को न केवल भावनात्मक क्षति हुई बल्कि आर्थिक नुकसान भी हुआ। आदेश में परिवार की जीवनयापन क्षमता और मृतक की आय का पूरा आंकलन कर मुआवजे की राशि तय की गई।
MACT ने यह भी स्पष्ट किया कि बीमा कंपनी जिम्मेदार है और उन्हें निर्धारित राशि 9 प्रतिशत ब्याज के साथ समयबद्ध तरीके से भुगतान करना होगा। ट्रिब्यूनल के अनुसार, यह राशि मृतक के परिवार के जीवनयापन और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर निर्धारित की गई है।
बाल किशन के परिवार ने हादसे के बाद लंबे समय तक न्याय की उम्मीद लगाई हुई थी। आदेश सुनने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली और कहा कि न्याय मिलने से उनके दुख में कुछ हद तक शांति आई है। उन्होंने सरकार और न्यायपालिका की कार्रवाई की सराहना की।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के आदेश सड़क सुरक्षा और ट्रांसपोर्ट नियमों के पालन के महत्व को उजागर करते हैं। सड़क हादसों में आम नागरिकों के अधिकारों और मुआवजे की प्रक्रिया के प्रति जागरूकता बढ़ाने में MACT के ऐसे फैसले महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सड़क सुरक्षा के मामलों में यह मामला उदाहरण के रूप में सामने आता है कि कैसे ट्रक मालिक और चालक की लापरवाही आम नागरिकों के जीवन को जोखिम में डाल सकती है। ट्रिब्यूनल का यह आदेश अन्य वाहनों के मालिकों और चालक वर्ग के लिए भी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
कुल मिलाकर, MACT का यह निर्णय सड़क हादसों में पीड़ित परिवारों के अधिकारों की रक्षा और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मृतक के परिवार को वित्तीय मदद और कानूनी राहत मिलने से उनके जीवन में स्थिरता आने की संभावना है।
ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि बीमा कंपनियों को समय पर मुआवजा राशि का भुगतान करना अनिवार्य है और उन्हें नियमों के पालन में सख्ती बरतनी होगी, ताकि पीड़ित परिवारों को न्याय पाने में किसी तरह की देरी न हो।

