खरीफ सीजन 2026: देश को 390.54 लाख टन उर्वरकों की जरूरत, उपलब्धता पर केंद्र की नजर
खरीफ सीजन 2026 की तैयारियों के बीच देश में उर्वरकों की उपलब्धता एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने और फसल उत्पादन को प्रभावित होने से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने उर्वरकों की मांग और आपूर्ति पर विशेष ध्यान देना शुरू कर दिया है।
खरीफ सीजन में बढ़ती है उर्वरकों की मांग
धान, मक्का, सोयाबीन, कपास और दालों जैसी खरीफ फसलों की बुवाई के दौरान उर्वरकों की मांग में तेजी आती है। ऐसे में समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद की उपलब्धता कृषि उत्पादन के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
केंद्र सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार, चालू खरीफ सीजन में देश को कुल 390.54 लाख टन उर्वरकों की आवश्यकता होगी। इसमें यूरिया, डीएपी, एनपीके और अन्य प्रमुख उर्वरक शामिल हैं।
सरकार ने शुरू की तैयारियां
कृषि और उर्वरक मंत्रालय राज्यों के साथ मिलकर मांग और आपूर्ति की स्थिति की लगातार समीक्षा कर रहे हैं। सरकार का उद्देश्य है कि किसानों को बुवाई के समय किसी प्रकार की कमी का सामना न करना पड़े।
इसके लिए उर्वरक कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने, आयात प्रक्रिया को तेज करने और राज्यों में समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है पर्याप्त उपलब्धता?
उर्वरकों की कमी होने पर किसानों को अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है और फसलों की उत्पादकता भी प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि खरीफ सीजन शुरू होने से पहले उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण और वितरण सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता में शामिल रहता है।
राज्यों को दिए गए आवश्यक निर्देश
केंद्र ने राज्यों से उर्वरकों के वितरण की नियमित निगरानी करने और कालाबाजारी जैसी गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई करने को कहा है। साथ ही किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूक करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
कृषि उत्पादन पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उर्वरकों की आपूर्ति मांग के अनुरूप बनी रहती है तो खरीफ फसलों का उत्पादन बेहतर रहने की संभावना है। वहीं किसी भी प्रकार की कमी का असर सीधे कृषि उत्पादन और किसानों की आय पर पड़ सकता है।

