जेएनयू में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज होने पर छात्रों का प्रदर्शन, न्याय और रिहाई के नारे
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में छात्र संघ और वामपंथी छात्र संगठनों ने रविवार को उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज होने के विरोध में प्रदर्शन किया। छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ ‘न्याय दो’ और ‘रिहाई दो’ के नारे लगाते हुए न्यायपालिका और सरकार के कदमों पर सवाल उठाए।
प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने कहा कि छात्रों के अधिकारों और न्याय की प्रक्रिया में निष्पक्षता बनाए रखने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि यह विरोध 2020 में जेएनयू में हुई हिंसा की बरसी के मौके पर भी किया गया। छात्र संगठनों ने आरोप लगाया कि उस हिंसा में शामिल हमलावरों की पहचान नहीं हो पाई, जबकि आरोप बिना सबूत के छात्रों पर लगाए गए। इस मामले में छात्रों ने न्याय और जवाबदेही की मांग की।
जेएनयू परिसर में प्रस्तावित फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम को लेकर भी छात्रों ने नाराजगी जताई। उनका कहना है कि यह कदम छात्रों की निजता और स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने वाला है। छात्रों ने चेतावनी दी कि बिना व्यापक सहमति के इस तरह के निगरानी उपाय लागू करना शिक्षा संस्थान के स्वतंत्र और सुरक्षित माहौल के खिलाफ है।
छात्र संगठनों के नेताओं ने कहा कि न्यायपालिका के फैसले का विरोध शांतिपूर्ण ढंग से किया गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका उद्देश्य केवल न्याय और सुरक्षा की मांग करना है, न कि विश्वविद्यालय में अशांति फैलाना। प्रदर्शनकारी छात्रों ने परिसर में पोस्टर, बैनर और नारेबाजी के माध्यम से अपनी मांगों को व्यक्त किया।
सुरक्षा के मद्देनजर परिसर में पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन की अतिरिक्त तैनाती की गई थी। प्रशासन ने प्रदर्शन के दौरान छात्रों और अन्य लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष व्यवस्था की। किसी भी प्रकार की हिंसा या अराजकता को रोकने के लिए अधिकारी लगातार निगरानी पर थे।
जेएनयू छात्र संघ ने इस प्रदर्शन को शिक्षा संस्थानों में लोकतंत्र और अधिकारों की रक्षा का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि छात्रों को न्यायिक फैसलों और प्रशासनिक नीतियों पर सवाल उठाने का अधिकार होना चाहिए, और किसी भी लोकतांत्रिक समाज में यह मौलिक अधिकार माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि विश्वविद्यालयों में इस तरह के विरोध प्रदर्शन यह दिखाते हैं कि छात्र अपने अधिकारों और न्याय प्रणाली के प्रति जागरूक हैं, लेकिन उन्हें हमेशा शांतिपूर्ण और संवैधानिक ढंग से ही अपनी आवाज उठानी चाहिए।
इस प्रदर्शन ने जेएनयू और देश के अन्य शैक्षणिक संस्थानों में छात्र अधिकार, न्याय और निगरानी तकनीक पर बहस को फिर से गर्म कर दिया है। छात्रों की मांगों और प्रशासन की प्रतिक्रिया अब देशभर में ध्यान का केंद्र बनी हुई है।

