हाईकोर्ट का निर्देश: PG चलाने वाली बिल्डिंग्स की पहचान करें, सिर्फ अवैध निर्माण के आंकड़ों पर निर्भर न रहें
हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश वाली पीठ ने पीजी (पेइंग गेस्ट) के संचालन और भवनों से जुड़े मामले में अधिकारियों को महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि संबंधित अधिकारियों को उन इमारतों की पहचान करनी चाहिए, जहां पीजी संचालित किए जा रहे थे। इसके लिए केवल अवैध निर्माण से जुड़े सामान्य आंकड़ों पर निर्भर नहीं किया जा सकता।
अधिकारियों को करनी होगी भवनों की पहचान
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने अधिकारियों से कहा कि कार्रवाई के लिए स्पष्ट रूप से यह पता लगाया जाए कि किन-किन इमारतों में पीजी चल रहे थे। कोर्ट का जोर भवनों की वास्तविक पहचान और वहां संचालित गतिविधियों की जानकारी जुटाने पर रहा।
अदालत ने संकेत दिया कि केवल अवैध निर्माण के कुल आंकड़े प्रस्तुत करने से यह स्पष्ट नहीं होता कि किन इमारतों में पीजी संचालित किए जा रहे थे।
सामान्य आंकड़ों के बजाय ठोस जानकारी पर जोर
पीठ ने अधिकारियों के सामने रखे गए सामान्य आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रशासन को अधिक सटीक जानकारी जुटानी चाहिए। संबंधित भवनों की पहचान, उनके इस्तेमाल और पीजी संचालन से जुड़े तथ्यों को अलग-अलग दर्ज करना जरूरी है।
इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किन भवनों में नियमों के अनुरूप पीजी संचालित हो रहे थे और किन मामलों में नियमों का उल्लंघन हुआ।
प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ी
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद संबंधित अधिकारियों को पीजी संचालन वाली इमारतों की पहचान कर उनके संबंध में विस्तृत जानकारी जुटानी होगी। इसके बाद नियमों के उल्लंघन की स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रभावी कार्रवाई के लिए सामान्य और समग्र आंकड़ों के बजाय वास्तविक भवनों और उनके इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी जरूरी है।

