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दिल्ली में 2005-2024 के बीच हार्ट अटैक और निमोनिया से मौतों में इजाफा, 2024 सबसे घातक साल

दिल्ली में 2005-2024 के बीच हार्ट अटैक और निमोनिया से मौतों में इजाफा, 2024 सबसे घातक साल

राजधानी दिल्ली में हार्ट अटैक और निमोनिया के कारण होने वाली मौतों का आंकड़ा चिंताजनक रूप ले चुका है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2005 से 2024 के बीच हार्ट अटैक से 3,29,857 लोगों की मौत हुई, जिसमें 2024 साल सबसे घातक साबित हुआ। वहीं, निमोनिया से मौतों में भी बढ़ोतरी देखी गई, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के बीच।

हार्ट अटैक से मौतों का विश्लेषण
दिल्ली में हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते स्ट्रेस, अस्वास्थ्यकर खान-पान, धूम्रपान और कम शारीरिक गतिविधि मुख्य कारण हैं। 2024 में स्वास्थ्य विभाग ने रिपोर्ट की कि हृदय रोगों से मौतों में पिछले वर्षों की तुलना में तेज़ी से वृद्धि हुई, जिससे यह साल सबसे घातक साबित हुआ।

अधिकतर मौतें अस्पतालों में गंभीर स्थिति में भर्ती होने के बाद हुईं। विशेषज्ञों के अनुसार, हृदय रोगियों को समय पर इमरजेंसी इलाज और कार्डियोलॉजिस्ट की सलाह न मिलने से मौतें बढ़ रही हैं। उनका कहना है कि अगर मरीज शुरुआती लक्षणों पर तुरंत इलाज शुरू करते, तो कई जिंदगियां बच सकती थीं।

निमोनिया से मौतों का बढ़ता आंकड़ा
वहीं, निमोनिया से होने वाली मौतों में भी बढ़ोतरी देखी गई है। खासतौर पर छोटे बच्चे और बुजुर्ग इसकी चपेट में आते हैं। अधिकतर मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं, जब उनकी हालत गंभीर हो चुकी होती है। डॉक्टरों के अनुसार, निमोनिया के शुरुआती लक्षण अक्सर अनदेखे रह जाते हैं, जैसे बुखार, खांसी और सांस लेने में तकलीफ, जिससे समय पर इलाज नहीं हो पाता।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली की वायु गुणवत्ता और प्रदूषण भी निमोनिया और श्वसन रोगों के बढ़ते मामलों के लिए जिम्मेदार हैं। धूल, धुआं और अन्य प्रदूषक फेफड़ों को प्रभावित करते हैं और रोग के गंभीर होने की संभावना बढ़ाते हैं।

सरकार और स्वास्थ्य व्यवस्था की चुनौती
दिल्ली सरकार ने हार्ट अटैक और निमोनिया से होने वाली मौतों को कम करने के लिए कई पहलें की हैं, जैसे स्मार्ट स्वास्थ्य केंद्र, इमरजेंसी अस्पताल सुविधाओं का विस्तार और जागरूकता अभियान। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि जन-जागरूकता और समय पर उपचार ही इन मौतों को रोकने में सबसे प्रभावी उपाय हैं।

विशेष रूप से हार्ट अटैक और निमोनिया के रोगियों को नियमित चेकअप, स्वस्थ आहार, धूम्रपान और शराब से परहेज, व्यायाम और समय पर इलाज की सलाह दी जाती है।

दिल्ली में हृदय रोग और निमोनिया से मौतों का आंकड़ा पिछले 20 वर्षों में बढ़ता रहा है। 2024 का साल विशेष रूप से चिंताजनक रहा, और यह संकेत देता है कि स्वास्थ्य सेवाओं, प्रदूषण नियंत्रण और लोगों की जागरूकता में और सुधार की आवश्यकता है। अगर समय रहते इलाज और सावधानियां अपनाई जाएं, तो आने वाले वर्षों में इन मौतों में कमी लाई जा सकती है।

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