दिल्ली-NCR में बढ़ रहे H1N1 के मामले: उमस और बदलते मौसम के बीच बढ़ा संक्रमण, सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर भी चपेट में
दिल्ली-NCR में मानसून के बीच उमस और मौसम में लगातार बदलाव के कारण H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के मामलों में तेजी देखी जा रही है। दिल्ली में इस साल 12 अगस्त तक H1N1 के 1,449 मामले सामने आ चुके हैं, जो पिछले साल इसी अवधि में दर्ज 229 मामलों के मुकाबले छह गुना से अधिक हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, बदलते मौसम और नमी के बीच सांस से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। दिल्ली-NCR के अस्पतालों में बुखार, खांसी, जुकाम और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षणों के साथ पहुंचने वाले मरीजों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। गुरुग्राम में डॉक्टरों ने पिछले कुछ सप्ताह से ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ने की जानकारी दी है।
सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर भी संक्रमित
H1N1 संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच सरकारी अस्पतालों के कुछ डॉक्टरों और अस्पताल प्रमुखों के भी संक्रमित होने की खबर सामने आई है। इससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव की चिंता बढ़ी है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है और अस्पताल स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं।
दिल्ली सरकार के अस्पतालों में फ्लू और उससे होने वाली संभावित जटिलताओं से निपटने के लिए व्यवस्थाएं मजबूत की जा रही हैं। दिल्ली के कुछ प्रमुख अस्पतालों में H1N1 मरीजों के लिए अलग वार्ड की व्यवस्था भी की गई है।
बच्चों और बुजुर्गों को ज्यादा सावधानी की जरूरत
डॉक्टरों के अनुसार H1N1 किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है। हालांकि बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और पहले से मधुमेह, हृदय, फेफड़ों या अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। कुछ मामलों में सांस की गंभीर समस्या और ऑक्सीजन स्तर गिरने जैसी स्थिति भी सामने आई है।
H1N1 के सामान्य लक्षणों में बुखार, खांसी, सिरदर्द, शरीर में दर्द, थकान, ठंड लगना और पसीना आना शामिल हैं। यदि बुखार या सांस से जुड़ी परेशानी लगातार बनी रहती है या स्थिति बिगड़ती है तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
विशेषज्ञों ने लोगों को भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी बरतने, हाथों की स्वच्छता बनाए रखने और सांस से जुड़े लक्षण होने पर दूसरों से दूरी रखने की सलाह दी है। फिलहाल दिल्ली-NCR में बढ़ते H1N1 मामलों पर स्वास्थ्य विभाग और अस्पतालों की नजर बनी हुई है।

