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एयरोसिटी टाउनशिप के लिए लैंड पूलिंग से जमीन लेगा GDA, किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा

एयरोसिटी टाउनशिप के लिए लैंड पूलिंग से जमीन लेगा GDA, किसाएयरोसिटी टाउनशिप के लिए लैंड पूलिंग से जमीन लेगा GDA, किसानों को मिलेगा बड़ा फायदानों को मिलेगा बड़ा फायदा

एयरोसिटी टाउनशिप विकसित करने की योजना को लेकर गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) ने जमीन जुटाने की तैयारी शुरू कर दी है। टाउनशिप के लिए जमीन अधिग्रहण के बजाय लैंड पूलिंग मॉडल अपनाने की योजना है। इस व्यवस्था के तहत किसानों से जमीन लेकर उसे योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा। इसके बदले किसानों को जमीन और विकास का लाभ देने का प्रावधान रहेगा।

लैंड पूलिंग मॉडल में किसानों की जमीन को एक साथ लेकर उस क्षेत्र में सड़क, पार्क, आवासीय और व्यावसायिक सुविधाओं जैसी बुनियादी संरचनाएं विकसित की जाती हैं। विकास के बाद तय नियमों के अनुसार किसानों को उनकी हिस्सेदारी के अनुरूप विकसित जमीन वापस दी जाती है। इससे किसानों को जमीन की बढ़ी हुई कीमत का लाभ मिलने की संभावना रहती है।

GDA की प्रस्तावित एयरोसिटी टाउनशिप को आधुनिक सुविधाओं से विकसित करने की योजना है। टाउनशिप के लिए जरूरी जमीन जुटाने में लैंड पूलिंग को महत्वपूर्ण विकल्प माना जा रहा है। इस मॉडल से प्राधिकरण को एक बड़े क्षेत्र में योजनाबद्ध विकास करने में मदद मिलेगी, वहीं किसानों के हितों को भी योजना में शामिल किया जा सकेगा।

किसानों को कैसे होगा फायदा?

लैंड पूलिंग व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसानों को जमीन के बदले केवल एकमुश्त मुआवजे तक सीमित नहीं रहना पड़ता। विकसित क्षेत्र में उन्हें तय हिस्सेदारी के अनुसार जमीन मिलने का विकल्प होता है। यदि टाउनशिप के आसपास विकास के साथ जमीन के दाम बढ़ते हैं तो किसानों को भविष्य में इसका आर्थिक लाभ मिल सकता है।

इसके अलावा क्षेत्र में सड़क, बिजली, पानी, सीवर और अन्य नागरिक सुविधाएं विकसित होने से जमीन की उपयोगिता भी बढ़ सकती है। हालांकि किसानों को मिलने वाली जमीन की मात्रा, स्थान और अन्य लाभ योजना के अंतिम नियमों तथा GDA की शर्तों पर निर्भर करेंगे।

एयरोसिटी टाउनशिप के आकार और प्रस्तावित विकास को देखते हुए लैंड पूलिंग से जुड़ी प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है। किसानों की सहमति, जमीन का चिन्हांकन और विकास योजना के नियम इस पूरी प्रक्रिया के अहम हिस्से होंगे। योजना के आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होगा कि कितने किसानों की जमीन इसमें शामिल होगी और उन्हें किस आधार पर विकसित जमीन या अन्य लाभ दिए जाएंगे।

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