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दिल्ली के सरकारी स्कूलों में ई-टैबलेट योजना शिक्षकों के लिए वित्तीय बोझ

दिल्ली के सरकारी स्कूलों में ई-टैबलेट योजना शिक्षकों के लिए वित्तीय बोझ

राजधानी दिल्ली के सरकारी स्कूलों में लागू ई-टैबलेट योजना अब शिक्षकों के लिए वित्तीय बोझ बनती जा रही है। जानकारी के अनुसार, पिछले दो साल से अधिक समय से लगभग 60,000 शिक्षकों को उन टैबलेट का भुगतान नहीं मिला है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ा है।

सरकारी शिक्षकों ने बताया कि यह टैबलेट योजना शुरू में शिक्षण प्रक्रिया में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू की गई थी। योजना के तहत प्रत्येक शिक्षक को ई-टैबलेट प्रदान किया गया, जिसे उन्होंने अपनी व्यक्तिगत जानकारी और भुगतान की शर्तों के अनुसार स्वीकार किया। लेकिन अब कई शिक्षकों ने शिकायत की है कि योजना के तहत उन्हें टैबलेट की कीमत का भुगतान अभी तक नहीं मिला, और कई शिक्षक इसे अपने निजी खर्च से वहन करने को मजबूर हैं।

शिक्षकों का कहना है कि यह मामला केवल आर्थिक दबाव का नहीं है, बल्कि उनके लिए मानसिक तनाव और कार्य करने की क्षमता पर भी असर डाल रहा है। उन्होंने अधिकारियों से अनुरोध किया है कि जल्द से जल्द भुगतान प्रक्रिया को पूरा किया जाए और उन्हें यह वित्तीय बोझ से मुक्त किया जाए।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल शिक्षा के उपकरण शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए उपयोगी हैं, लेकिन अगर इसके लिए शिक्षक अचानक आर्थिक बोझ उठाने के लिए मजबूर हों, तो इसका प्रभाव नकारात्मक होता है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को ऐसी योजनाओं में भुगतान प्रक्रिया और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए।

दिल्ली शिक्षा विभाग ने इस मामले में कहा है कि भुगतान में देरी तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से हुई है। विभाग ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही सभी शिक्षकों का भुगतान पूरा किया जाएगा और उन्हें किसी भी प्रकार के अतिरिक्त बोझ का सामना नहीं करना पड़ेगा। अधिकारियों ने कहा कि यह मामला उनके लिए प्राथमिकता सूची में है और शीघ्र समाधान के लिए कार्यवाही जारी है।

शिक्षकों के बीच यह मामला चिंता का विषय बन गया है। कई शिक्षक अपने टैबलेट के उपयोग के बावजूद वित्तीय बोझ उठाने को लेकर परेशान हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के आश्वासन के बावजूद, दो साल से अधिक समय से भुगतान न होने के कारण कई शिक्षक अपने व्यक्तिगत खर्च और परिवार की आवश्यकताओं में कठिनाई का सामना कर रहे हैं।

विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि डिजिटल शिक्षा के उपकरण जैसे ई-टैबलेट योजना, यदि शिक्षकों के लिए बोझ बन जाए, तो यह योजना का उद्देश्य प्रभावित कर सकती है। इसलिए सरकार को समय पर भुगतान, प्रशिक्षण और उपकरणों की सपोर्ट प्रणाली सुनिश्चित करनी चाहिए।

इस मामले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि तकनीकी और डिजिटल उपकरणों के लाभ तभी सही मायनों में समाज और शिक्षकों तक पहुंचते हैं, जब इसके लिए वित्तीय, प्रशासनिक और तकनीकी व्यवस्थाएं पूरी तरह से सक्षम हों।

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