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उत्तर रेलवे में हिंदी में कामकाज की समीक्षा के लिए विभागीय निरीक्षण का निर्देश

उत्तर रेलवे में हिंदी में कामकाज की समीक्षा के लिए विभागीय निरीक्षण का निर्देश

उत्तर रेलवे के अधिकारियों को विभागीय निरीक्षण के दौरान हिंदी में कामकाज की स्थिति की समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है। यह निर्णय हिंदी के प्रयोग और राजभाषा के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।

सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय अपर महाप्रबंधक हर्ष खरे की अध्यक्षता में हुई क्षेत्रीय राजभाषा कार्यान्वयन समिति की बैठक में लिया गया। बैठक में सभी प्रमुख विभागाध्यक्षों ने भाग लिया और अपने-अपने विभागों में हिंदी के उपयोग की स्थिति पर चर्चा की।

बैठक में अधिकारियों ने यह तय किया कि विभागीय निरीक्षण के दौरान प्रत्येक कार्यालय और विभाग में हिंदी में दस्तावेज, पत्राचार और रिपोर्टिंग की समीक्षा की जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी विभागों में राजभाषा के प्रयोग में सुधार और नियमितता बनी रहे।

हर्ष खरे ने बैठक में जोर देकर कहा कि हिंदी का व्यावहारिक उपयोग और जागरूकता बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विभागीय निरीक्षण केवल औपचारिकता तक सीमित न रहे, बल्कि सभी कर्मचारियों द्वारा हिंदी का सक्रिय प्रयोग किया जाए।

विशेषज्ञों का कहना है कि रेलवे जैसे बड़े संगठन में राजभाषा का प्रभावी कार्यान्वयन न केवल कर्मचारियों के लिए आसान होगा, बल्कि जनता के साथ संचार को भी सरल और पारदर्शी बनाएगा। विभागीय निरीक्षण के दौरान हिंदी में कामकाज की स्थिति की समीक्षा से यह सुनिश्चित होगा कि सभी आदेश, रिपोर्ट और निर्देश हिंदी में उपलब्ध हों

बैठक में यह भी चर्चा हुई कि हिंदी में कामकाज को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण और कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। अधिकारियों को बताया गया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और ईमेल के माध्यम से भी हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा दिया जा सकता है।

सामाजिक दृष्टिकोण से देखें तो यह पहल न केवल कर्मचारियों के लिए लाभकारी है, बल्कि सामान्य जनता के लिए भी सरकारी सेवाओं को अधिक सुलभ और समझने योग्य बनाएगी। रेलवे के यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए यह एक सकारात्मक संकेत है कि उनके साथ होने वाला संवाद सुलभ और स्थानीय भाषा में होगा।

कुल मिलाकर, उत्तर रेलवे के विभागीय निरीक्षण के दौरान हिंदी में कामकाज की समीक्षा करने का निर्देश राजभाषा कार्यान्वयन को मजबूती देगा। हर्ष खरे की अध्यक्षता में हुई समिति की बैठक ने यह सुनिश्चित किया कि हिंदी का प्रयोग सिर्फ औपचारिकता न रहे, बल्कि सभी स्तरों पर व्यावहारिक और नियमित रूप से हो। इस कदम से न केवल रेलवे के कर्मचारियों में जागरूकता बढ़ेगी, बल्कि यात्रियों और जनता के साथ बेहतर संचार भी स्थापित होगा।

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