धीरेंद्र शास्त्री ने जेन-जी के ‘कॉकरोच’ वाले बयान पर जताई नाराजगी, बोले- युवाओं को विवेकानंद और कलाम जैसा देखना चाहते हैं
बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने जेन-जी के एक बयान पर नाराजगी जताई है। जेन-जी के कुछ युवाओं द्वारा खुद को ‘कॉकरोच’ बताए जाने की बात पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि भारत के संविधान ने लोगों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दी है, इसलिए कोई भी व्यक्ति कुछ भी कह सकता है और कुछ भी बन सकता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि वह देश के युवाओं को इस तरह नहीं, बल्कि महान व्यक्तित्वों के आदर्शों पर आगे बढ़ते हुए देखना चाहते हैं।
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि भारत की संविधान प्रदत्त स्वतंत्रता की यही विशेषता है कि यहां व्यक्ति अपनी बात कह सकता है और अपनी पसंद के अनुसार पहचान बना सकता है। उन्होंने जेन-जी की सोच पर टिप्पणी करते हुए कहा कि युवाओं के पास अपनी बात रखने और सवाल उठाने का अधिकार है, लेकिन उनकी उम्मीद है कि देश की युवा पीढ़ी सकारात्मक दिशा में आगे बढ़े।
उन्होंने कहा कि वह भारत के जेन-जी युवाओं को स्वामी विवेकानंद, अल्बर्ट आइंस्टीन और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जैसे महान लोगों से प्रेरणा लेते हुए देखना चाहते हैं। उनके मुताबिक, युवाओं में प्रतिभा, ऊर्जा और कुछ नया करने की क्षमता है। इस ऊर्जा का इस्तेमाल देश और समाज के विकास में किया जाना चाहिए।
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि युवा पीढ़ी देश का भविष्य है। ऐसे में युवाओं को अपनी क्षमता पहचानकर शिक्षा, विज्ञान, तकनीक और राष्ट्र निर्माण जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने युवाओं से महान व्यक्तित्वों के जीवन और विचारों से प्रेरणा लेने की अपील की।
उनकी टिप्पणी ऐसे समय आई है जब जेन-जी की पहचान, विचारधारा और सामाजिक मुद्दों पर उनकी सक्रियता को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। सोशल मीडिया के दौर में युवा अपनी अलग पहचान और विचारों को खुलकर सामने रखते हैं। कई मुद्दों पर जेन-जी का नजरिया पिछली पीढ़ियों से अलग भी दिखाई देता है।
धीरेंद्र शास्त्री ने हालांकि युवाओं के अभिव्यक्ति के अधिकार को नकारा नहीं, लेकिन यह जरूर कहा कि उनकी आकांक्षा है कि जेन-जी अपनी ऊर्जा और स्वतंत्र सोच का इस्तेमाल सकारात्मक बदलाव के लिए करे।
उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी जेन-जी की सोच और युवाओं से जुड़ी अपेक्षाओं को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। बयान को जहां कुछ लोग युवाओं को प्रेरित करने वाली अपील मान रहे हैं, वहीं कुछ लोग इसे जेन-जी की अभिव्यक्ति पर टिप्पणी के तौर पर देख रहे हैं।

