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डिलीवरी ऐप से सामान भेजने वाले हो जाएं सतर्क, सेफ्टी और फास्ट सर्विस के दावों पर उठे सवाल

डिलीवरी ऐप से सामान भेजने वाले हो जाएं सतर्क, सेफ्टी और फास्ट सर्विस के दावों पर उठे सवाल

अगर आप भी ऑनलाइन डिलीवरी ऐप के जरिए पार्सल, दस्तावेज या कीमती सामान भेजते हैं, तो अब अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। ग्राहकों को तेज और सुरक्षित डिलीवरी का भरोसा देने वाली कई कंपनियों की सेवाओं को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। हाल के मामलों में सामान गायब होने, देर से डिलीवरी, गलत पते पर पार्सल पहुंचने और ग्राहक शिकायतों के समाधान में लापरवाही जैसी शिकायतें सामने आई हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी से बढ़ते ऑनलाइन डिलीवरी बाजार में कंपनियां बड़े-बड़े दावे तो करती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कई जगह सेवाओं की गुणवत्ता उम्मीद के मुताबिक नहीं दिख रही। खासकर महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान, जरूरी दस्तावेज और संवेदनशील पार्सल भेजने वाले ग्राहकों को अधिक सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

कई उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया है कि पार्सल ट्रैकिंग सिस्टम सही जानकारी नहीं देता और शिकायत दर्ज कराने के बाद भी समाधान में काफी समय लग जाता है। कुछ मामलों में डिलीवरी एजेंट बदलने, गलत हैंडलिंग और सुरक्षा मानकों की कमी जैसी समस्याएं भी सामने आई हैं।

उपभोक्ता अधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि ग्राहक अक्सर ऐप पर दिखने वाले “सेफ”, “इंस्टेंट” और “गारंटीड” जैसे दावों पर भरोसा कर लेते हैं, लेकिन उन्हें सेवा की शर्तों और सुरक्षा नियमों को भी ध्यान से पढ़ना चाहिए।

विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि कीमती सामान भेजने से पहले उसकी फोटो, पैकेजिंग और रिसीट सुरक्षित रखें। साथ ही ऐसे सामान के लिए बीमा या अतिरिक्त सुरक्षा विकल्प उपलब्ध हो तो उसका इस्तेमाल करना बेहतर हो सकता है।

डिजिटल और ई-कॉमर्स सेक्टर में तेजी से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण कंपनियां कम समय में ज्यादा डिलीवरी करने पर जोर दे रही हैं। इसका असर कई बार सेवा की गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी ग्राहक का सामान गुम हो जाता है या नुकसान पहुंचता है, तो उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। हालांकि कई बार कंपनियों की शर्तें मुआवजे की सीमा तय कर देती हैं, इसलिए पहले से नियम समझना जरूरी है।

फिलहाल ऑनलाइन डिलीवरी सेवाएं लोगों की जरूरत का बड़ा हिस्सा बन चुकी हैं, लेकिन लगातार सामने आ रही शिकायतों ने इन सेवाओं की विश्वसनीयता और सुरक्षा व्यवस्था पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

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