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दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट ने बढ़ाई चिंता, SIR में पुरानी मतदाता सूची की 3 बड़ी गड़बड़ियां सामने आईं

दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट ने बढ़ाई चिंता, SIR में पुरानी मतदाता सूची की 3 बड़ी गड़बड़ियां सामने आईं

दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद राजधानी की चुनावी राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ गई है। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के तहत तैयार की गई ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 47.7 लाख नाम शामिल नहीं हैं। इससे एक ओर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम को लेकर सवाल खड़े हुए हैं, तो दूसरी ओर पुरानी मतदाता सूची की गुणवत्ता पर भी चर्चा शुरू हो गई है।

SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और मृत, स्थानांतरित तथा डुप्लीकेट जैसे रिकॉर्ड को हटाकर सूची को अधिक सटीक बनाना है। दिल्ली में 1.45 करोड़ से अधिक पुराने मतदाताओं के मुकाबले ड्राफ्ट सूची में करीब 97.5 लाख नाम शामिल किए गए हैं। हालांकि, ड्राफ्ट सूची अंतिम नहीं है और जिन पात्र मतदाताओं के नाम छूट गए हैं, उन्हें दावा और आपत्ति दर्ज कराने का मौका दिया गया है।

पुरानी सूची में पहली गड़बड़ी: मृत मतदाताओं के नाम

SIR के दौरान सामने आई प्रमुख समस्याओं में ऐसे मतदाताओं के नाम शामिल होना है, जिनकी मृत्यु हो चुकी है। यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद भी उसका नाम मतदाता सूची में बना रहता है, तो इससे चुनावी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।

ऐसे नामों को हटाना मतदाता सूची को अपडेट करने की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। SIR के दौरान घर-घर जाकर सत्यापन और रिकॉर्ड की जांच के जरिए ऐसे मामलों की पहचान करने की कोशिश की गई है।

दूसरी समस्या: दूसरी जगह जा चुके मतदाता

दूसरी बड़ी गड़बड़ी उन मतदाताओं से जुड़ी है, जो स्थायी रूप से दिल्ली से बाहर जा चुके हैं, लेकिन उनका नाम पुरानी सूची में बना हुआ था। महानगरों में नौकरी, कारोबार और दूसरी वजहों से लोगों का लगातार एक शहर से दूसरे शहर में स्थानांतरण होता रहता है।

ऐसे मामलों में पुराने पते पर मतदाता का नाम बने रहने से एक ही व्यक्ति का रिकॉर्ड अलग-अलग जगहों पर होने की संभावना पैदा होती है। SIR का मकसद ऐसे रिकॉर्ड की पहचान कर मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है।

तीसरी समस्या: डुप्लीकेट या दोहरी प्रविष्टियां

पुरानी मतदाता सूची में डुप्लीकेट एंट्री भी एक महत्वपूर्ण समस्या के रूप में सामने आई है। इसका मतलब है कि किसी व्यक्ति का नाम एक से ज्यादा स्थानों या एक ही क्षेत्र में एक से अधिक बार दर्ज हो सकता है।

SIR के दौरान ऐसे रिकॉर्ड की पहचान कर उन्हें दुरुस्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। चुनाव आयोग लंबे समय से मतदाता सूची में डुप्लीकेट नामों और अन्य विसंगतियों को दूर करने पर जोर देता रहा है।

लाखों नाम छूटने पर अब क्या होगा?

ड्राफ्ट सूची से नाम गायब होने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति का नाम हमेशा के लिए मतदाता सूची से हट गया है। ड्राफ्ट रोल जारी होने के बाद पात्र नागरिकों को दावा और आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया गया है। दिल्ली में यह प्रक्रिया 31 अगस्त से 30 सितंबर 2026 तक चलने की जानकारी दी गई है।

इस दौरान जिन लोगों का नाम गलती से ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं हुआ है, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना दावा पेश कर सकते हैं। इसके बाद चुनाव अधिकारियों द्वारा दस्तावेजों और पात्रता की जांच की जाएगी।

पुरानी सूची पर क्यों उठे सवाल?

दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट ने यह सवाल भी सामने रखा है कि यदि SIR के दौरान इतने बड़े पैमाने पर मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट रिकॉर्ड की पहचान हो रही है, तो पुरानी मतदाता सूची में इन रिकॉर्ड को समय रहते क्यों नहीं हटाया गया।

हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि ड्राफ्ट सूची अभी अंतिम सूची नहीं है। दावा और आपत्तियों के बाद कई नाम दोबारा शामिल हो सकते हैं और रिकॉर्ड में सुधार किया जा सकता है।

इस पूरी प्रक्रिया का अंतिम उद्देश्य एक ऐसी मतदाता सूची तैयार करना है जिसमें केवल पात्र और वास्तविक मतदाताओं के नाम हों। अब दिल्ली के मतदाताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम यही है कि वे ड्राफ्ट सूची में अपना नाम जरूर जांचें और किसी तरह की गलती मिलने पर निर्धारित समय सीमा के भीतर दावा या आपत्ति दर्ज कराएं।

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