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दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग का फैसला: इस्तेमाल की गई सेवाओं का भुगतान करना अनिवार्य, क्रेडिट लिमिट ओवर होने पर शुल्क ‘सेवा में कमी’ नहीं

दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग का फैसला: इस्तेमाल की गई सेवाओं का भुगतान करना अनिवार्य, क्रेडिट लिमिट ओवर होने पर शुल्क ‘सेवा में कमी’ नहीं

दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग ने हाल ही में एक अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि ग्राहक को इस्तेमाल की गई सेवाओं का भुगतान करना ही होगा, चाहे वह किसी प्रकार की असहमति या विवाद में क्यों न हो। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि ग्राहक अपनी क्रेडिट लिमिट पार कर देता है और उसके कारण अतिरिक्त शुल्क लगता है, तो इसे ‘सेवा में कमी’ के रूप में नहीं देखा जा सकता।

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि सेवाओं के लिए संपूर्ण भुगतान करना ग्राहक की जिम्मेदारी है। आयोग ने यह निर्णय विभिन्न उपभोक्ता शिकायतों के आधार पर लिया, जहां ग्राहक यह दावा कर रहे थे कि अतिरिक्त शुल्क या क्रेडिट लिमिट पार होने पर उनकी ओर से कोई भुगतान न करना उचित है। आयोग ने इन दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि सेवाओं का इस्तेमाल किया गया है और उसके लिए भुगतान करना अनिवार्य है।

विशेष रूप से आयोग ने यह भी कहा कि क्रेडिट लिमिट पार होने पर लगाया गया अतिरिक्त शुल्क किसी भी तरह से सेवा की गुणवत्ता या उपलब्धता में कमी नहीं दर्शाता। इसका मतलब है कि ग्राहक द्वारा अतिरिक्त शुल्क का बहाना बनाकर भुगतान से बचना कानूनी दृष्टि से स्वीकार्य नहीं है।

उपभोक्ता आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय ग्राहक और सेवा प्रदाता दोनों के हित में है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सेवा प्रदाता को उनके द्वारा प्रदान की गई सेवाओं का उचित मुआवजा मिले, और ग्राहकों को यह समझ आए कि किसी भी सेवा के इस्तेमाल के बाद भुगतान से बचना नियमों के खिलाफ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय वित्तीय अनुशासन और उपभोक्ता संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आयोग ने साफ किया है कि उपभोक्ता अधिकारों का मतलब केवल शिकायत दर्ज करना या विवाद खड़ा करना नहीं है, बल्कि सर्विस का सही उपयोग और उसके लिए भुगतान करना भी उपभोक्ता की जिम्मेदारी है।

इस फैसले से सेवाओं के क्षेत्र में वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा मिलेगा और उपभोक्ताओं तथा सेवा प्रदाताओं के बीच स्पष्ट जिम्मेदारियों और दायित्वों का मार्गदर्शन होगा। आयोग ने यह संदेश भी दिया कि भुगतान से संबंधित मामलों में अनावश्यक विवादों से बचने के लिए ग्राहक और प्रदाता दोनों को स्पष्ट समझौते और नियमों का पालन करना चाहिए।

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