दिल्ली में पेयजल संकट से निपटने की तैयारी, सप्लाई सिस्टम में बड़े बदलाव पर विचार
दिल्ली सरकार राजधानी की पेयजल व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए सप्लाई सिस्टम में सुधार की संभावनाओं पर विचार कर रही है। जल संकट और बढ़ती शिकायतों को देखते हुए सरकार ने मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है।
लोक निर्माण एवं जल आपूर्ति से जुड़े मंत्री प्रवेश वर्मा ने बताया कि दिल्ली की 13 विधानसभा क्षेत्रों से पेयजल को लेकर सबसे अधिक शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। इन शिकायतों में पानी की अनियमित आपूर्ति, कम दबाव से जल सप्लाई और कुछ क्षेत्रों में टैंकरों पर बढ़ती निर्भरता जैसे मुद्दे प्रमुख हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, गर्मियों के मौसम में दिल्ली की दैनिक जल आवश्यकता लगभग 1250 एमजीडी तक पहुंच जाती है। इसके मुकाबले राजधानी में करीब 1000 एमजीडी पानी का ही उत्पादन हो पाता है। यानी मांग और आपूर्ति के बीच लगभग 250 एमजीडी का अंतर बना रहता है, जिसका असर कई इलाकों में देखने को मिलता है।
सरकार का मानना है कि केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि वितरण प्रणाली को भी अधिक दक्ष बनाना जरूरी है। इसी वजह से पाइपलाइन नेटवर्क, जल भंडारण, लीकेज नियंत्रण और आपूर्ति प्रबंधन से जुड़े सुधारों पर विचार किया जा रहा है। इससे उपलब्ध पानी का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली जैसे बड़े महानगर में बढ़ती आबादी और गर्मियों के दौरान पानी की खपत में वृद्धि के कारण जल प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसे में आधुनिक तकनीक और बेहतर वितरण व्यवस्था के जरिए जल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
फिलहाल सरकार प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां जल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। आने वाले समय में नई नीतियों और सुधारों के जरिए राजधानीवासियों को बेहतर पेयजल सुविधाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

