संसद सुरक्षा पर दायर जनहित याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- 'संसदीय लोकतंत्र को आपके उपदेश की जरूरत नहीं'
संसद की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि "संसदीय लोकतंत्र को आपके उपदेश की जरूरत नहीं है।" कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद मामले की सुनवाई चर्चा का विषय बन गई।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने संसद परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और उससे जुड़े विभिन्न मुद्दों को अदालत के समक्ष उठाया। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि संसद की सुरक्षा अत्यंत संवेदनशील विषय है और इससे जुड़े मामलों में संबंधित सक्षम संस्थाएं और एजेंसियां अपने दायित्वों का निर्वहन कर रही हैं।
अदालत ने याचिकाकर्ता से यह भी पूछा कि जनहित याचिका दाखिल करने का आधार क्या है और क्या याचिका में ऐसे ठोस तथ्य प्रस्तुत किए गए हैं, जिन पर न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता हो। कोर्ट ने संकेत दिया कि जनहित याचिका का उपयोग केवल प्रचार या व्यक्तिगत विचार व्यक्त करने के मंच के रूप में नहीं किया जा सकता।दिल्ली हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि संसदीय लोकतंत्र एक मजबूत संवैधानिक व्यवस्था है और इसके संचालन तथा सुरक्षा को लेकर स्थापित संस्थागत तंत्र मौजूद है। ऐसे में बिना पर्याप्त आधार के इस प्रकार की याचिकाएं दाखिल करना उचित नहीं माना जा सकता।
सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता को संयम बरतने की सलाह दी और कहा कि न्यायालय केवल उन मामलों में हस्तक्षेप करता है, जहां कानूनी और तथ्यात्मक आधार स्पष्ट रूप से मौजूद हों। अदालत की टिप्पणी से यह संदेश भी गया कि जनहित याचिकाओं का उद्देश्य वास्तव में जनहित होना चाहिए, न कि केवल सामान्य या काल्पनिक आशंकाओं को उठाना।फिलहाल मामले में अदालत ने सुनवाई के दौरान अपनी कड़ी टिप्पणी दर्ज की है। आगे की कार्यवाही अदालत के निर्देशों और मामले के तथ्यों के आधार पर तय होगी।

