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दिल्ली हाई कोर्ट ने AI फिल्म के ब्रॉडकास्ट पर लगाई अंतरिम रोक, पवन कल्याण के बेटे का नाम और इमेज बिना अनुमति उपयोग का आरोप

दिल्ली हाई कोर्ट ने AI फिल्म के ब्रॉडकास्ट पर लगाई अंतरिम रोक, पवन कल्याण के बेटे का नाम और इमेज बिना अनुमति उपयोग का आरोप

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक AI (Artificial Intelligence) से बनी फिल्म के ब्रॉडकास्ट पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह आदेश उस शिकायत के बाद आया है जिसमें आरोप लगाया गया है कि फिल्म में आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और अभिनेता पवन कल्याण के बेटे, अकीरा नंदन का नाम, इमेज, समानता, आवाज़ और पर्सनैलिटी बिना अनुमति के इस्तेमाल किया गया है।

फिल्म निर्माता और प्रसारक पर आरोप है कि उन्होंने AI तकनीक का उपयोग करके अकीरा नंदन की पहचान और विशेषताएँ फिल्मों में दर्शाया, जिससे व्यक्तिगत अधिकार और गोपनीयता का उल्लंघन हुआ। इस मामले में पवन कल्याण और उनके परिवार ने कोर्ट में शिकायत दर्ज कर फिल्म के प्रसारण पर रोक लगाने की मांग की थी।

कोर्ट ने कहा कि मामले में गंभीर और संवेदनशील आरोप हैं। न्यायालय ने फिल्म के प्रसारण और किसी भी तरह के डिजिटल माध्यम पर रिलीज़ पर अंतरिम रोक लगा दी है, जब तक कि मामले की पूरी जांच और सुनवाई नहीं हो जाती। अदालत ने निर्माता और प्रसारक को इस संबंध में नोटिस जारी किया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि AI तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ व्यक्तिगत अधिकारों और गोपनीयता का उल्लंघन तेजी से बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई और अंतरिम रोक आवश्यक होती है, ताकि किसी की छवि और पहचान का दुरुपयोग न हो।

पवन कल्याण ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनके परिवार और बेटे के अधिकारों का उल्लंघन स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अदालत तेजी से निर्णय लेकर न्याय सुनिश्चित करेगी।

फिल्म उद्योग में यह मामला एक नए विवाद का उदाहरण है, जिसमें AI और डिजिटल तकनीक के अनुचित उपयोग को लेकर कानूनी सीमा और जिम्मेदारी पर सवाल उठाए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में ऐसे मामलों की संख्या बढ़ सकती है, इसलिए AI और डिजिटल मीडिया के लिए स्पष्ट नियम और कानून बनाने की जरूरत है।

कोर्ट ने फिलहाल अंतरिम रोक लगाकर यह सुनिश्चित किया है कि फिल्म का प्रसारण अकीरा नंदन और परिवार के अधिकारों का उल्लंघन न करे। अदालत ने कहा कि फिल्म के किसी भी हिस्से को डिजिटल प्लेटफॉर्म, टीवी या सिनेमाघरों में प्रसारित करना फिलहाल प्रतिबंधित रहेगा।

कुल मिलाकर, दिल्ली हाई कोर्ट का यह आदेश AI तकनीक से बने कंटेंट और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस मामले से फिल्म उद्योग और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म को यह स्पष्ट संदेश मिल गया है कि किसी भी व्यक्ति की पहचान, आवाज़ या पर्सनैलिटी का अनुमति के बिना उपयोग गंभीर कानूनी परिणाम ला सकता है।

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