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दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला: बीएसएफ में वरिष्ठता नियुक्ति की तारीख से तय, सब-इंस्पेक्टरों की याचिकाएं खारिज

दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला: बीएसएफ में वरिष्ठता नियुक्ति की तारीख से तय, सब-इंस्पेक्टरों की याचिकाएं खारिज

दिल्ली हाई कोर्ट ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में वरिष्ठता के निर्धारण को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बीएसएफ में वरिष्ठता केवल नियुक्ति की तारीख के आधार पर तय की जाती है, न कि चयन प्रक्रिया या अन्य आधारों से।

यह मामला उन सब-इंस्पेक्टरों से जुड़ा था जिनकी नियुक्ति मेडिकल री-एग्जामिनेशन के कारण देरी से हुई थी। प्रभावित अधिकारियों ने वरिष्ठता में पिछड़ने के कारण अदालत में याचिका दायर की थी। उनका तर्क था कि नियुक्ति में देरी उनके करियर और पदोन्नति पर नकारात्मक असर डाल रही है।

हालांकि, हाई कोर्ट ने याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि बीएसएफ नियमों के अनुसार नियुक्ति की तारीख ही प्राथमिक आधार है, और यह नियम सभी अधिकारियों पर समान रूप से लागू होता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सेना या अर्धसैनिक बलों में चयन प्रक्रिया के दौरान होने वाली देरी या मेडिकल री-एग्जामिनेशन जैसी परिस्थितियां वरिष्ठता पर प्रभाव नहीं डालतीं।

वकीलों और विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय अर्धसैनिक बलों में प्रशासनिक स्पष्टता और अनुशासन बनाए रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। वरिष्ठता का निर्धारण सिर्फ नियुक्ति की तारीख से करने का नियम सुनिश्चित करता है कि सभी अधिकारियों के लिए समान अवसर और पारदर्शिता बनी रहे।

बीएसएफ अधिकारियों ने अदालत के फैसले का स्वागत किया। उनका कहना है कि इस निर्णय से कार्यक्षमता और अनुशासन को बनाए रखने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, यह फैसला भविष्य में समान परिस्थितियों में आने वाले विवादों को रोकने में भी सहायक होगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि अर्धसैनिक बलों में वरिष्ठता का निर्धारण संवेदनशील मामला होता है, क्योंकि यह पदोन्नति, जिम्मेदारी और वेतन संरचना से सीधे जुड़ा होता है। अदालत का यह आदेश इस प्रक्रिया को नियम और कानून के अनुसार सुव्यवस्थित करता है।

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