आरक्षण विरोधी प्रदर्शन की अनुमति पर दिल्ली HC की पुलिस को फटकार, पूछा- पूर्ण प्रतिबंध कैसे लगा सकते हैं?
नई दिल्ली में आरक्षण नीतियों के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं देने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली पुलिस से सवाल किए। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने पुलिस की ओर से प्रदर्शन की अनुमति खारिज किए जाने पर पूछा कि इस तरह पूर्ण प्रतिबंध कैसे लगाया जा सकता है। मामला क्षत्रिय करणी सेना की ओर से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति से जुड़ा है।
प्रस्तावित प्रदर्शन में आरक्षण नीतियों के साथ-साथ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी UGC के उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाले 2026 के नियमों का विरोध किया जाना था। संगठन ने 20 सितंबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए अनुमति मांगी थी।
पुलिस के फैसले पर कोर्ट ने उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पुलिस से पूछा कि प्रदर्शन की अनुमति पूरी तरह खारिज करने की जरूरत क्यों पड़ी। कोर्ट ने इस बात पर सवाल उठाया कि यदि पुलिस को किसी तरह की आशंका थी तो प्रदर्शनकारियों पर उचित शर्तें लगाई जा सकती थीं।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने पुलिस से पूछा कि केवल इस आशंका के आधार पर कि कुछ लोग प्रदर्शन में शामिल हो सकते हैं, अनुमति को पूरी तरह कैसे खारिज किया जा सकता है। कोर्ट की टिप्पणी के बाद मामले में पुलिस के रुख पर चर्चा तेज हो गई।
पुलिस ने नियमों और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने पुलिस की कार्रवाई का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि पुलिस ने संबंधित स्टैंडिंग ऑर्डर और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की है। मामले में प्रदर्शन की अनुमति और कानून-व्यवस्था से जुड़े पहलुओं पर अदालत के सामने पक्ष रखा गया।
इससे पहले 7 सितंबर को भी हाईकोर्ट ने इसी मामले में पुलिस को प्रदर्शन के आवेदन पर विचार कर निर्णय लेने का निर्देश दिया था। अदालत ने कहा था कि पुलिस प्रदर्शन की अनुमति देते समय उचित शर्तें लगा सकती है और संगठन को अपने निर्णय की जानकारी देनी होगी।
दूसरे स्थान पर प्रदर्शन की संभावना
गुरुवार की सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से संकेत दिया गया कि जंतर-मंतर के बजाय किसी दूसरे स्थान पर प्रदर्शन की अनुमति देने के विकल्प पर विचार किया जा सकता है। इसी आधार पर अदालत ने मामले की सुनवाई आगे के लिए टाल दी।
मामले में मुख्य सवाल यह है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति देते समय प्रशासन किस तरह कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं को ध्यान में रख सकता है। अदालत ने सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि यदि किसी प्रदर्शन को लेकर प्रशासन को आपत्ति है तो क्या पूर्ण रोक लगाने के बजाय उचित शर्तों के साथ अनुमति देने का विकल्प अपनाया जा सकता है।
फिलहाल अदालत ने मामले में अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। प्रदर्शन की अनुमति, स्थान और उस पर लागू होने वाली संभावित शर्तों को लेकर पुलिस के अगले निर्णय और अदालत की आगे की कार्यवाही पर नजर रहेगी।

