दिल्ली सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है, जिसके तहत आरबीआई अब दिल्ली सरकार का बैंकर, ऋण प्रबंधक और वित्तीय एजेंट के रूप में कार्य करेगा। इस समझौते का उद्देश्य राजधानी में यमुना सफाई, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और अन्य विकास कार्यों के लिए वित्तीय संसाधनों की सुविधा सुनिश्चित करना है।
सरकार के अनुसार, इस समझौते से दिल्ली को कम ब्याज दरों पर ऋण मिलने की संभावना बढ़ जाएगी। इससे राज्य के विकास कार्यों में धन की कमी नहीं रहेगी और परियोजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन संभव होगा। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम वित्तीय अनुशासन और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है।
आरबीआई की भूमिका अब सिर्फ केंद्रीय बैंक तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वह दिल्ली सरकार के ऋण प्रबंधन, धन प्रवाह और वित्तीय योजना में भी मदद करेगा। इससे राज्य सरकार को अपनी परियोजनाओं के लिए सटीक और प्रभावी वित्तीय प्रबंधन करने में आसानी होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता राजधानी में जारी यमुना सफाई अभियान, परिवहन और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को गति देने में मदद करेगा। कम ब्याज दर पर ऋण मिलने से सरकार स्वयं की आय और व्यय में संतुलन बनाए रखते हुए विकास कार्य कर सकेगी।
सरकार ने यह भी बताया कि इस कदम से राज्य की वित्तीय स्थिति में पारदर्शिता और अनुशासन बढ़ेगा। आरबीआई की निगरानी और सहयोग से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि राज्य का पैसा परियोजनाओं में उचित और समय पर खर्च हो।
राजनीतिक और प्रशासनिक विश्लेषकों का कहना है कि यह समझौता दिल्ली सरकार की विकासात्मक प्राथमिकताओं को सशक्त बनाने वाला साबित होगा। विशेष रूप से यमुना सफाई परियोजनाओं और शहरी बुनियादी ढांचे में निवेश के लिए यह सहूलियत राजधानीवासियों के जीवन स्तर में सुधार ला सकती है।
इसके अलावा, वित्तीय एजेंट के रूप में आरबीआई की भागीदारी से अनियंत्रित ऋण लेने और व्यय करने की जोखिम कम होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे राज्य को वित्तीय स्थिरता और विकास दोनों सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

