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भारत में डेटा सेंटर की बिजली मांग 800% बढ़ने का अनुमान, वीडियो में जानें 2031-32 तक 13.56 गीगावॉट तक पडेगी जरूरत

भारत में डेटा सेंटर की बिजली मांग 800% बढ़ने का अनुमान, वीडियो में जानें 2031-32 तक 13.56 गीगावॉट तक पडेगी जरूरत

भारत में तेजी से बढ़ती डिजिटल सेवाओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के विस्तार के कारण आने वाले वर्षों में डेटा सेंटरों की बिजली खपत में भारी बढ़ोतरी होने वाली है। सरकार के अनुमान के अनुसार देश में डेटा सेंटरों की बिजली मांग 2031-32 तक लगभग 800% तक बढ़ सकती है।

सरकार ने संसद में जानकारी दी कि देश में डेटा सेंटरों से बिजली की मांग 2031-32 तक करीब 13.56 गीगावॉट (GW) तक पहुंच सकती है। यह वृद्धि मुख्य रूप से AI आधारित सेवाओं, क्लाउड कंप्यूटिंग और बड़े पैमाने पर डिजिटल डेटा प्रोसेसिंग के कारण होगी।

तेजी से बढ़ रहा डेटा सेंटर सेक्टर

इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने संसद में बताया कि पिछले कुछ वर्षों में भारत में डेटा सेंटर क्षमता तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2020 में यह क्षमता लगभग 375 मेगावॉट थी, जो 2025 तक करीब 1,500 मेगावॉट तक पहुंचने का अनुमान है।

डेटा सेंटर वे विशाल तकनीकी ढांचे होते हैं जहां इंटरनेट सेवाएं, क्लाउड प्लेटफॉर्म, डिजिटल पेमेंट, वीडियो स्ट्रीमिंग और AI आधारित एप्लिकेशन का डेटा प्रोसेस और स्टोर किया जाता है। भारत में डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ इनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है।

AI और डिजिटल सेवाओं से बढ़ेगी मांग

विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले वर्षों में AI, क्लाउड कंप्यूटिंग, सोशल मीडिया और डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म की बढ़ती मांग डेटा सेंटर उद्योग को तेजी से आगे बढ़ाएगी। यही कारण है कि बिजली की खपत में भी कई गुना बढ़ोतरी होने का अनुमान लगाया गया है।

सरकार ने AI विकास को बढ़ावा देने के लिए देशभर में डेटा सेंटरों के जरिए 38,000 से अधिक GPU उपलब्ध कराए हैं। ये स्टार्टअप, शोध संस्थानों और शैक्षणिक संस्थाओं को सब्सिडी दर पर दिए जा रहे हैं।

देश के बड़े शहर बन रहे डेटा सेंटर हब

भारत में कई बड़े शहर डेटा सेंटर के प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहे हैं। इनमें मुंबई, नवी मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु, नोएडा और जामनगर जैसे शहर शामिल हैं, जहां बड़ी संख्या में डेटा सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं।

तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि भारत तेजी से एक वैश्विक डेटा सेंटर हब बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। लेकिन इसके साथ ही बिजली आपूर्ति, ट्रांसमिशन नेटवर्क और ऊर्जा प्रबंधन की चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं।

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