शीतलहर और घने कोहरे ने बढ़ाई रेल यात्रियों की परेशानी, आनंद विहार टर्मिनल पर दिखा मानवीय संकट
उत्तर भारत में जारी भीषण शीतलहर और घने कोहरे ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। खासतौर पर रेल यात्रियों के लिए यह मौसम किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं साबित हो रहा। दिल्ली के आनंद विहार टर्मिनल पर देर रात का दृश्य आम यात्रियों की पीड़ा को बयां करता नजर आया, जहां सैकड़ों यात्री ठंड से बचने के लिए प्लेटफॉर्म पर कंबल और चादरों में लिपटकर जमीन पर बैठे या लेटे दिखे।
घने कोहरे के कारण ट्रेनों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। कई ट्रेनें घंटों की देरी से चल रही हैं, जबकि कुछ को रद्द भी किया गया है। इसका सीधा असर यात्रियों पर पड़ा है, जिन्हें अनिश्चित समय तक प्लेटफॉर्म पर इंतजार करना पड़ रहा है। आनंद विहार टर्मिनल पर परिवारों के साथ यात्रा कर रहे यात्री, जिनमें छोटे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल थे, ठंड से बचने के लिए एक-दूसरे के करीब सिमटे हुए नजर आए।
प्लेटफॉर्म पर बैठे यात्रियों ने बताया कि ट्रेन के देर होने की सूचना तो मिल जाती है, लेकिन यह नहीं बताया जाता कि आखिर इंतजार कब खत्म होगा। कई यात्रियों के पास पर्याप्त गर्म कपड़े तक नहीं थे। मजबूरी में लोग फर्श पर बैठकर या लेटकर समय काटते दिखे। कुछ यात्रियों ने बताया कि वे रात भर ठंड में बैठे रहे, जिससे बच्चों और बुजुर्गों की तबीयत बिगड़ने का डर बना हुआ है।
रेलवे प्रशासन की ओर से यात्रियों की सुविधा के लिए कुछ इंतजाम जरूर किए गए हैं, लेकिन मौजूदा हालात में वे नाकाफी साबित हो रहे हैं। सीमित संख्या में कंबल उपलब्ध होने के कारण सभी जरूरतमंद यात्रियों तक मदद नहीं पहुंच पा रही है। इसके अलावा, प्लेटफॉर्म पर पर्याप्त हीटर या गर्म प्रतीक्षालय की व्यवस्था न होने से लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।
मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर भारत में अगले कुछ दिनों तक शीतलहर और कोहरे का असर बना रह सकता है। ऐसे में रेल सेवाओं के और अधिक प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोहरे के कारण दृश्यता बेहद कम हो जाती है, जिससे ट्रेनों की रफ्तार धीमी करनी पड़ती है और सुरक्षा कारणों से कई बार उन्हें रोका भी जाता है।
यात्रियों का कहना है कि वे समझते हैं कि मौसम खराब है, लेकिन कम से कम उनके ठहरने और गर्म रहने की बेहतर व्यवस्था की जानी चाहिए। कई यात्रियों ने रेलवे से मांग की है कि सर्दी के मौसम में अतिरिक्त कंबल, अस्थायी शेल्टर और गर्म पेयजल जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
यह दृश्य केवल आनंद विहार तक सीमित नहीं है। उत्तर भारत के कई प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर इसी तरह के हालात देखने को मिल रहे हैं। यह स्थिति उन लाखों यात्रियों की कठिनाइयों को उजागर करती है, जो रोजी-रोटी, पारिवारिक जरूरतों या मजबूरी में सफर करते हैं और मौसम की मार झेलने को मजबूर हैं।
कुल मिलाकर, शीतलहर और कोहरे ने एक बार फिर रेल व्यवस्था की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्लेटफॉर्म पर कंबल में लिपटे यात्रियों का यह दृश्य न केवल मौसम की सख्ती को दिखाता है, बल्कि यह भी याद दिलाता है कि यात्री सुविधाओं को लेकर अभी बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है।

