मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्ति मामला: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, याचिकाकर्ता ने उठाए पारदर्शिता पर सवाल
मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस मामले में याचिकाकर्ता ने नियुक्ति प्रणाली की पारदर्शिता और स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक निकाय की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और राजनीतिक प्रभाव से मुक्त होनी चाहिए। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में कार्यपालिका की भूमिका अधिक होने से चयन प्रक्रिया की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।
याचिकाकर्ता ने यह भी तर्क दिया कि लोकतांत्रिक प्रणाली की मजबूती के लिए चुनाव आयोग की निष्पक्षता बेहद जरूरी है, क्योंकि यही संस्था देश में चुनावों की पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करती है।
वहीं, सरकार की ओर से यह दलील दी गई कि नियुक्ति प्रक्रिया संविधान और मौजूदा कानूनों के तहत ही की जा रही है और इसमें किसी तरह की अनियमितता नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया है।
इस मामले को लोकतांत्रिक व्यवस्था और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा अहम मुद्दा माना जा रहा है, जिस पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं।

