राजधानी दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने 2018 में दर्ज एक महत्वपूर्ण मामले में दो आरोपियों को बरी कर दिया है। इन दोनों पर आतंकी संगठन ISIS-JK से जुड़े होने का आरोप लगाते हुए गिरफ्तारी की गई थी, लेकिन कोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से मुक्त कर दिया।
कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए सबूत यह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं कि आरोपी किसी भी तरह से Islamic State of Iraq and Syria (ISIS) के जम्मू-कश्मीर मॉड्यूल से जुड़े थे। पर्याप्त और ठोस सबूतों के अभाव में दोनों आरोपियों को बरी किया गया।
मामला वर्ष 2018 का है, जब जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया था कि ये दोनों व्यक्ति एक प्रतिबंधित आतंकी संगठन से जुड़े हो सकते हैं। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था और उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया था। हालांकि, लंबे समय तक चली सुनवाई के दौरान जांच एजेंसियां अपने आरोपों को साबित नहीं कर सकीं।
कोर्ट ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को केवल संदेह के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता, बल्कि दोष सिद्ध करने के लिए ठोस और विश्वसनीय सबूत जरूरी होते हैं। इसी आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाया।
इस फैसले के बाद दोनों आरोपियों को राहत मिली है। वहीं, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला इस बात को रेखांकित करता है कि न्याय व्यवस्था में सबूतों की अहमियत सर्वोपरि है।
कुल मिलाकर, पटियाला हाउस कोर्ट का यह निर्णय न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता और सबूतों के महत्व को दर्शाता है, जहां बिना पुख्ता प्रमाण के किसी को भी दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

