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अगस्त में दिल्ली-NCR पर मेहरबान बंगाल की खाड़ी, 3 साल में सामान्य से 78% ज्यादा बारिश; जानें क्या है वजह

अगस्त में दिल्ली-NCR पर मेहरबान बंगाल की खाड़ी, 3 साल में सामान्य से 78% ज्यादा बारिश; जानें क्या है वजह

दिल्ली-एनसीआर में अगस्त के महीने में पिछले तीन वर्षों से सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में बनने वाले कम दबाव के क्षेत्र जब उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ते हैं, तो उनका असर दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में दिखाई देता है। यही वजह है कि अगस्त में राजधानी क्षेत्र में बारिश का आंकड़ा सामान्य से काफी ऊपर पहुंच रहा है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार बंगाल की खाड़ी मानसून के दौरान बनने वाले कम दबाव वाले क्षेत्रों का प्रमुख स्रोत है। जब ये सिस्टम विकसित होकर उत्तर-पश्चिम की दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो मध्य भारत से होते हुए उत्तर-पश्चिम भारत की ओर बढ़ते हैं। इस दौरान इनके प्रभाव से दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां बढ़ जाती हैं।

तीन साल से लगातार ज्यादा बारिश

मौसम विभाग के आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन वर्षों के दौरान अगस्त में दिल्ली-एनसीआर में सामान्य से करीब 78 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई है। अगस्त के दौरान सामान्य मानसूनी गतिविधियों के अलावा बंगाल की खाड़ी से आने वाले कम दबाव वाले सिस्टम अतिरिक्त बारिश कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इन सिस्टम के कारण दिल्ली-एनसीआर में कई बार कुछ ही दिनों में भारी बारिश हो जाती है। लगातार बारिश के चलते शहर के निचले इलाकों में जलभराव, सड़कों पर ट्रैफिक की समस्या और सामान्य जनजीवन प्रभावित होने जैसी स्थितियां भी देखने को मिलती हैं।

कैसे बनता है कम दबाव का क्षेत्र

बंगाल की खाड़ी में समुद्र की सतह का तापमान और वातावरण की अनुकूल परिस्थितियां मानसून के दौरान कम दबाव वाले क्षेत्रों के निर्माण में मदद करती हैं। ये सिस्टम धीरे-धीरे जमीन की ओर बढ़ते हैं और मानसूनी हवाओं के साथ उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हैं।

जब कम दबाव का क्षेत्र उत्तर-पश्चिम भारत की ओर बढ़ता है, तो इसके साथ नमी से भरी हवाएं भी पहुंचती हैं। दिल्ली-एनसीआर में पहले से मौजूद मानसूनी परिस्थितियों के साथ इनके मिलने पर बारिश की तीव्रता बढ़ सकती है।

अगस्त में क्यों बढ़ जाती है बारिश

अगस्त मानसून के सक्रिय चरणों में से एक माना जाता है। इस दौरान बंगाल की खाड़ी में एक के बाद एक मौसम प्रणालियां बन सकती हैं। यदि इनका ट्रैक उत्तर-पश्चिम दिशा में रहता है, तो मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर समेत कई क्षेत्रों में बारिश प्रभावित होती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली-एनसीआर में पिछले कुछ वर्षों में अगस्त के दौरान बारिश की अधिकता को समझने के लिए बंगाल की खाड़ी में बनने वाली मौसम प्रणालियों के रास्ते और उनकी तीव्रता को देखना जरूरी है।

आने वाले समय में भी मौसम पर नजर

बंगाल की खाड़ी में बनने वाले कम दबाव के क्षेत्रों की दिशा और ताकत मानसून की बारिश को प्रभावित करती है। ऐसे में दिल्ली-एनसीआर में अगस्त के दौरान मौसम का पूर्वानुमान इन प्रणालियों की गतिविधियों पर काफी हद तक निर्भर रहता है।

पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों में सामान्य से 78 फीसदी अधिक बारिश दर्ज होना इस बदलाव को समझने के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। आने वाले दिनों में भी बंगाल की खाड़ी में बनने वाले सिस्टम और उनके उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने की स्थिति पर मौसम विभाग की नजर बनी रहेगी।

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