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दिल्ली-NCR में पड़ोसी राज्यों की बसों की एंट्री पर रोक, GRAP-1 लागू होते ही ट्रैफिक पुलिस का बड़ा फैसला; बॉर्डर से लौटेंगी ये बसें

दिल्ली-NCR में पड़ोसी राज्यों की बसों की एंट्री पर रोक, GRAP-1 लागू होते ही ट्रैफिक पुलिस का बड़ा फैसला; बॉर्डर से लौटेंगी ये बसें

दिल्ली-NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है। ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण लागू होने के बाद अब पड़ोसी राज्यों से आने वाली नियमों का पालन नहीं करने वाली बसों को दिल्ली-NCR में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। ऐसी बसों को बॉर्डर से ही वापस मोड़ दिया जाएगा। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने यह फैसला प्रदूषण कम करने और सड़कों पर लगने वाले जाम से बचने के लिए लिया है। अधिकारियों के मुताबिक, केवल इलेक्ट्रिक, CNG और BS-VI मानकों वाली डीजल बसों को निर्धारित नियमों और शर्तों के तहत चलने की अनुमति होगी। 

GRAP-1 लागू होने के बाद लिया गया फैसला

दिल्ली-NCR में प्रदूषण नियंत्रण के लिए GRAP-1 लागू होने के बाद गुरुवार को दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के विशेष आयुक्त अजय चौधरी की अध्यक्षता में अंतरराज्यीय समन्वय बैठक हुई। इसमें पड़ोसी राज्यों के पुलिस अधिकारियों, संबंधित विभागों और नागरिक एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

बैठक में तय किया गया कि नियमों का उल्लंघन करने वाली अंतरशहरी और अंतरराज्यीय बसों को दिल्ली की सीमा में प्रवेश करने से पहले ही रोक दिया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि बसों को दिल्ली में प्रवेश करने के बाद वापस मोड़ने से ट्रैफिक जाम बढ़ता है और वाहनों से होने वाला प्रदूषण भी बढ़ सकता है। 

इन बसों को मिलेगी दिल्ली-NCR में एंट्री

नए निर्देशों के तहत निर्धारित शर्तों के अनुसार इन बसों को संचालन की अनुमति होगी:

  • इलेक्ट्रिक बसें: बिजली से चलने वाली बसें।
  • CNG बसें: सीएनजी ईंधन से चलने वाली बसें।
  • BS-VI डीजल बसें: निर्धारित BS-VI उत्सर्जन मानकों का पालन करने वाली बसें।

वहीं, लागू नियमों के दायरे में आने वाली अन्य बसों को दिल्ली-NCR में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। यह व्यवस्था हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड तथा जम्मू-कश्मीर जैसे पड़ोसी राज्यों से आने वाली बसों पर लागू निर्देशों के तहत की जा रही है। 

बॉर्डर पर लगाए जाएंगे सूचना बोर्ड

ट्रैफिक पुलिस ने दिल्ली के प्रमुख बॉर्डर पर बड़े सूचना बोर्ड लगाने का फैसला भी किया है। इन बोर्डों के जरिए वाहन चालकों को प्रतिबंधों और निर्धारित उत्सर्जन मानकों की जानकारी दी जाएगी।

नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए संयुक्त प्रवर्तन टीमें गठित करने पर भी विचार किया गया है। अधिकारियों को नो-एंट्री समय का सख्ती से पालन कराने, दिल्ली को अंतिम गंतव्य नहीं बनाने वाले वाहनों की जांच करने और ओवरलोड वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अलावा, निर्माण और विध्वंस सामग्री ले जाने वाले उन वाहनों पर भी कार्रवाई की जाएगी, जो निर्धारित नियमों का उल्लंघन करते पाए जाएंगे। वाहन चालकों को वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) रखने की सलाह दी गई है। 

1 नवंबर से बाहरी राज्यों के वाहनों पर भी प्रतिबंधों की समीक्षा

बैठक में 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक दिल्ली के बाहर पंजीकृत वाहनों पर लागू होने वाले प्रवेश प्रतिबंधों की भी समीक्षा की गई। ये प्रतिबंध अधिसूचित छूट और निर्धारित नियमों के अधीन होंगे।

दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए अधिकारियों ने संबंधित एजेंसियों को आपसी समन्वय मजबूत करने और नियमों को प्राथमिकता से लागू करने के निर्देश दिए हैं।

प्रदूषण रोकने के लिए सामूहिक प्रयास पर जोर

दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर नियंत्रण को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी दिशा में GRAP-1 के तहत बसों के संचालन पर प्रतिबंधों को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया गया है।

ट्रैफिक पुलिस ने स्पष्ट किया है कि प्रदूषण नियंत्रण और यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों को मिलकर काम करना होगा। आने वाले दिनों में बॉर्डर पर जांच और नियमों के पालन की निगरानी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

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