खराब मौसम और गिरते पारे ने दिल्ली को बनाया ‘गैस चैंबर’, AQI 418 के साथ हवा गंभीर श्रेणी में
राजधानी दिल्ली में गिरते तापमान और प्रतिकूल मौसमीय परिस्थितियों ने हालात को और बदतर बना दिया है। सोमवार सुबह दिल्ली की हवा एक बार फिर ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज की गई, जिससे पूरी राजधानी मानो गैस चैंबर में तब्दील हो गई है। सुबह की शुरुआत घनी धुंध और कोहरे की मोटी परत के साथ हुई, जिसके कारण कई इलाकों में दृश्यता बेहद कम रही और आम जनजीवन प्रभावित हुआ।
एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम फॉर दिल्ली द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार सुबह दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 418 दर्ज किया गया। यह स्तर ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत खतरनाक माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्तर की हवा में लंबे समय तक सांस लेना गंभीर बीमारियों को न्योता दे सकता है।
सुबह के समय आईटीओ, आनंद विहार, आरके पुरम, पंजाबी बाग, द्वारका और नोएडा से सटे इलाकों में धुंध इतनी घनी रही कि सड़क पर चल रहे वाहन मुश्किल से दिखाई दे रहे थे। कम दृश्यता के कारण कई जगहों पर यातायात की रफ्तार धीमी रही और लोगों को ऑफिस व स्कूल पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
गंभीर प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर सांस के मरीजों, बुजुर्गों और बच्चों पर देखा जा रहा है। अस्थमा और एलर्जी से पीड़ित लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है। कई लोगों ने आंखों में जलन, गले में खराश और सिरदर्द की शिकायत की है। अस्पतालों में सांस संबंधी समस्याओं के मरीजों की संख्या में भी इजाफा देखा जा रहा है।
प्रदूषण की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सड़कों पर बड़ी संख्या में लोग मास्क पहने नजर आए। खासकर सुबह और देर शाम के समय लोग खुले में निकलने से बचते दिखे। कई अभिभावकों ने बच्चों को घर से बाहर न भेजने का फैसला लिया है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान में गिरावट, हवा की रफ्तार कम होने और नमी बढ़ने के कारण प्रदूषक कण वातावरण में ही फंसे हुए हैं। इससे स्मॉग की स्थिति बनी हुई है। जब तक तेज हवा या बारिश नहीं होती, तब तक हालात में सुधार की उम्मीद कम है।
प्रशासन की ओर से लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि गंभीर श्रेणी के प्रदूषण के दौरान अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें, मास्क का उपयोग करें और सांस के मरीज अपनी दवाएं नियमित रूप से लें।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि पराली जलाने, वाहनों के धुएं, निर्माण कार्य और मौसम की प्रतिकूलता ने मिलकर हालात को गंभीर बना दिया है। ऐसे में दीर्घकालिक समाधान के बिना हर सर्दी में दिल्ली को इसी तरह प्रदूषण की मार झेलनी पड़ेगी।
कुल मिलाकर, सोमवार की सुबह दिल्लीवासियों के लिए चिंता लेकर आई है। गिरते पारे और खराब मौसम ने प्रदूषण को और घातक बना दिया है। अब लोगों की नजरें मौसम में बदलाव और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे राजधानी को इस दमघोंटू हवा से राहत मिल सके।

