। देश की राजधानी दिल्ली में बारापुला फ्लाईओवर के फेज-3 के निर्माण में देरी और लागत बढ़ोतरी को लेकर एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने FIR दर्ज की है। FIR में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7A और 13 के तहत कार्रवाई की गई है। यह मामला अज्ञात सरकारी अधिकारियों और एक निजी ठेकेदार के खिलाफ दर्ज किया गया है।
सूत्रों के अनुसार, ACB ने प्रारंभिक जांच के बाद पाया कि फ्लाईओवर निर्माण परियोजना में अनियमितताएं और लागत वृद्धि हुई है। जांच में यह संकेत मिला कि परियोजना के संचालन में कई स्तरों पर भ्रष्टाचार और नियमों का उल्लंघन हुआ। इसी आधार पर FIR दर्ज की गई।
FIR में आरोप लगाया गया है कि परियोजना की लागत और समयसीमा में अचानक वृद्धि हुई। यह वृद्धि किसी तकनीकी कारण या अनपेक्षित समस्या से अधिक अनियमित और संदिग्ध प्रतीत होती है। ACB ने बताया कि मामले में शामिल सरकारी अधिकारी और निजी ठेकेदार के खिलाफ विस्तृत जांच की जाएगी।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7A और 13 उन अधिकारियों और कर्मचारियों पर लागू होती है जिन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करके लाभ प्राप्त किया या परियोजना को प्रभावित किया। ACB ने कहा कि FIR दर्ज करने का उद्देश्य मामले की तत्काल और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है।
सिविल इंजीनियरिंग और परियोजना विशेषज्ञों का कहना है कि बारापुला फ्लाईओवर जैसे बड़े निर्माण कार्यों में लागत बढ़ोतरी सामान्य हो सकती है, लेकिन अनियमित वृद्धि और समयसीमा में देरी यदि लगातार होती रहे तो इसकी व्यावसायिक और कानूनी जांच आवश्यक हो जाती है। ACB की इस FIR से स्पष्ट हो गया कि प्रशासन और निवेशकों के हित में पारदर्शिता और जवाबदेही अनिवार्य है।
स्थानीय प्रशासन और परियोजना प्राधिकरण ने अभी इस FIR पर कोई टिप्पणी नहीं दी है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि परियोजना पर कार्यरत कई अधिकारी ACB की जांच में सहयोग कर रहे हैं। जांच में लागत बढ़ोतरी, सामग्री की खरीद, ठेकेदारों के अनुबंध और भुगतान के दस्तावेजों की समीक्षा की जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस FIR से अन्य सरकारी परियोजनाओं में भी भ्रष्टाचार और समयसीमा की निगरानी बढ़ेगी। यह कदम न केवल बारापुला फ्लाईओवर परियोजना के लिए बल्कि पूरे निर्माण क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देगा।
इस FIR के बाद सवाल उठ रहे हैं कि परियोजना की देरी और लागत वृद्धि के लिए कौन-कौन जिम्मेदार हैं। ACB की जांच आगे चलकर इस मामले के सभी पहलुओं को उजागर करेगी। सरकार और प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी संभावित भ्रष्ट अधिकारी या ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस प्रकार, दिल्ली में बारापुला फ्लाईओवर फेज-3 परियोजना में भ्रष्टाचार के आरोप ने न केवल परियोजना के संचालन में सवाल खड़े कर दिए हैं बल्कि यह दर्शाता है कि एंटी करप्शन तंत्र की सक्रियता से ही बड़े सार्वजनिक निर्माण कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखी जा सकती है।

