Samachar Nama
×

Air India Turbulence: आखिर क्या होता है एयर टर्बुलेंस? जानिए क्यों हिलने लगता है विमान और कब बढ़ जाता है खतरा

Air India Turbulence: आखिर क्या होता है एयर टर्बुलेंस? जानिए क्यों हिलने लगता है विमान और कब बढ़ जाता है खतरा

एयर इंडिया का एक विमान मंगलवार को उड़ान के दौरान अचानक तेज टर्बुलेंस (वायु अशांति) की चपेट में आ गया। इस दौरान विमान में जोरदार झटके लगे, जिससे 17 यात्री घायल हो गए। घटना के बाद एक बार फिर सवाल उठने लगा कि आखिर एयर टर्बुलेंस क्या होता है, यह क्यों होता है और क्या यह विमान के लिए खतरनाक होता है?

क्या होता है एयर टर्बुलेंस?

एयर टर्बुलेंस वह स्थिति होती है, जब हवा का प्रवाह अचानक अस्थिर हो जाता है। इसके कारण उड़ान भर रहा विमान ऊपर-नीचे या दाएं-बाएं तेजी से हिलने लगता है। यह सामान्य मौसम का हिस्सा हो सकता है और दुनिया भर में अधिकांश उड़ानों के दौरान कभी न कभी इसका सामना करना पड़ता है।

किन परिस्थितियों में होता है टर्बुलेंस?

एयर टर्बुलेंस कई कारणों से हो सकता है। सबसे आम कारण बादलों और गरज-चमक वाले मौसम के आसपास बनने वाली अस्थिर हवाएं हैं। इसके अलावा जेट स्ट्रीम, पर्वतीय क्षेत्रों के ऊपर बहने वाली तेज हवाएं, गर्म और ठंडी हवा के टकराने तथा साफ आसमान (क्लियर एयर टर्बुलेंस) में भी यह स्थिति पैदा हो सकती है। क्लियर एयर टर्बुलेंस सबसे चुनौतीपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसे रडार पर पहले से पहचानना मुश्किल होता है।

क्या टर्बुलेंस से विमान को खतरा होता है?

विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक यात्री विमान टर्बुलेंस को सहन करने के लिए ही डिजाइन किए जाते हैं। अधिकांश मामलों में टर्बुलेंस से विमान को कोई बड़ा नुकसान नहीं होता। हालांकि, यदि यात्री सीट बेल्ट नहीं लगाए हों या केबिन में खड़े हों, तो अचानक लगने वाले झटकों से चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है।

पायलट कैसे करते हैं सामना?

पायलट मौसम संबंधी रडार, एयर ट्रैफिक कंट्रोल और अन्य विमानों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर टर्बुलेंस वाले क्षेत्रों से बचने की कोशिश करते हैं। यदि टर्बुलेंस से बचना संभव नहीं हो, तो विमान की गति कम की जाती है और यात्रियों को तुरंत सीट बेल्ट बांधने का निर्देश दिया जाता है।

यात्रियों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि उड़ान के दौरान जब भी सीट पर बैठे हों, सीट बेल्ट बांधकर रखें, भले ही सीट बेल्ट का संकेत बंद हो। केबिन क्रू के निर्देशों का पालन करें और टर्बुलेंस के दौरान घबराने के बजाय शांत रहें। यही सावधानियां चोट के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकती हैं।

एयर टर्बुलेंस भले ही यात्रियों के लिए डरावना अनुभव हो, लेकिन अधिकांश मामलों में यह उड़ान का सामान्य हिस्सा होता है। आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित पायलट और सुरक्षा मानकों की बदौलत विमान ऐसे हालात से सुरक्षित तरीके से बाहर निकलने में सक्षम होते हैं।

Share this story

Tags