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इंडिया गेट मार्च से पहले केंद्र का बड़ा कदम, NEET प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR रद्द कराने सुप्रीम कोर्ट पहुंची सरकार; CJP नेताओं का खास रिएक्शन

इंडिया गेट मार्च से पहले केंद्र का बड़ा कदम, NEET प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR रद्द कराने सुप्रीम कोर्ट पहुंची सरकार; CJP नेताओं का खास रिएक्शन

5 सितंबर को प्रस्तावित इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक मार्च से पहले केंद्र सरकार ने NEET प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर बड़ा कदम उठाया है। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए प्रदर्शन के दौरान दर्ज मामलों को रद्द करने की मांग की है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने असाधारण अधिकार का इस्तेमाल करते हुए इन एफआईआर को खत्म करने का अनुरोध किया है।

केंद्र की इस पहल के बाद कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के नेताओं ने अलग अंदाज में प्रतिक्रिया दी है। CJP की ओर से पहले आरोप लगाया गया था कि सरकार ने प्रदर्शन खत्म करवाते समय प्रदर्शनकारियों से किए गए वादों को पूरा नहीं किया। एफआईआर वापस लेना उनकी प्रमुख मांगों में शामिल था। अब केंद्र के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने को संगठन अपने आंदोलन की मांग से जोड़कर देख रहा है।

5 सितंबर को इंडिया गेट से मार्च का ऐलान

CJP ने 5 सितंबर को दिल्ली में मार्च निकालने की घोषणा की है। प्रस्तावित मार्च इंडिया गेट से शुरू होकर दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक जाने की बात कही गई है। संगठन का कहना है कि इसमें NEET से जुड़े मामलों में जान गंवाने वाले छात्रों के परिवार और कथित पुलिस ज्यादती के पीड़ित भी शामिल होंगे।

CJP का आरोप है कि 25 जुलाई को आंदोलन खत्म कराते समय सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों की मांगों पर कार्रवाई का भरोसा दिया गया था, लेकिन बाद में एफआईआर वापस लेने के मामले में देरी हुई। इसी को लेकर संगठन ने दोबारा सड़क पर उतरने का फैसला किया।

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र की याचिका

केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका का उल्लेख किया। सरकार ने देशभर में NEET प्रदर्शन के दौरान दर्ज एफआईआर को एक साथ निपटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की है। मामले को जल्द सूचीबद्ध करने का अनुरोध भी किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक इसकी सुनवाई के लिए 1 सितंबर की तारीख सामने आई है।

सरकार का यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि CJP ने एफआईआर वापस लेने को आंदोलन की प्रमुख मांगों में शामिल किया था।

CJP नेताओं ने तस्वीरों के जरिए दिया रिएक्शन

केंद्र की याचिका के बाद CJP नेताओं ने सोशल मीडिया पर अपने अंदाज में प्रतिक्रिया दी। संगठन के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके ने बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की तस्वीर के साथ अपनी तस्वीर साझा कर इसे जीत के तौर पर पेश किया। वहीं सह-संयोजक सौरभ दास और आशुतोष रांका ने भी तस्वीरों के जरिए प्रतिक्रिया दी।

इससे पहले दीपके ने कहा था कि यदि सरकार एफआईआर वापस नहीं लेती है तो 5 सितंबर के मार्च के बाद पुलिस मुख्यालय पर धरना दिया जा सकता है। उन्होंने आंदोलन को पहले हुए जंतर-मंतर प्रदर्शन से भी बड़ा होने का दावा किया था।

मार्च पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक नहीं लगाई

इसी बीच 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने CJP के प्रस्तावित 5 सितंबर के मार्च पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि फिलहाल ऐसा मानने का कोई ठोस आधार नहीं है कि प्रदर्शन से कोई अप्रिय घटना होगी। कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी संबंधित प्रशासन और पुलिस पर छोड़ी गई है।

हालांकि दिल्ली पुलिस पहले कह चुकी है कि मार्च के लिए उसे औपचारिक अनुमति का अनुरोध नहीं मिला है और इंडिया गेट वाले इलाके में प्रदर्शन को लेकर प्रतिबंध लागू हैं।

अब केंद्र के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद 5 सितंबर के प्रस्तावित मार्च से पहले राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। एक तरफ सरकार ने एफआईआर रद्द कराने की न्यायिक प्रक्रिया शुरू की है, वहीं CJP इसे अपनी मांग की दिशा में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देख रहा है। सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि इन एफआईआर पर अदालत क्या रुख अपनाती है।

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