राशन की कालाबाजारी और चोरी करने वालों पर होगा एक्शन, ‘डिजिटल करेंसी’ से सर्जिकल स्ट्राइक करेगी रेखा सरकार
दिल्ली में राशन व्यवस्था को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। मुख्यमंत्री रेखा सरकार अब सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में पारदर्शिता लाने और राशन की कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए डिजिटल करेंसी आधारित मॉडल लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। सरकार का दावा है कि इस नई व्यवस्था से राशन चोरी, फर्जीवाड़ा और बिचौलियों के खेल पर “सर्जिकल स्ट्राइक” की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, सरकार खाद्य सब्सिडी वितरण के लिए सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) आधारित सिस्टम अपनाने की तैयारी में है। इस मॉडल के लागू होने के बाद लाभार्थियों को मिलने वाली सब्सिडी सीधे डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। इससे नकद लेनदेन और पारंपरिक व्यवस्था में होने वाली गड़बड़ियों पर काफी हद तक रोक लग सकेगी।
सरकार का मानना है कि वर्तमान व्यवस्था में कई जगहों पर राशन की चोरी, फर्जी कार्ड और कालाबाजारी जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं। कई बार गरीबों के हिस्से का राशन बाजार में बेचे जाने के आरोप भी लगते रहे हैं। ऐसे में डिजिटल करेंसी मॉडल लागू होने से हर लेनदेन का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में मौजूद रहेगा, जिससे निगरानी आसान हो जाएगी।
विशेषज्ञों के मुताबिक, CBDC यानी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी डिजिटल मुद्रा है। इसे डिजिटल रुपया भी कहा जाता है। यह पूरी तरह सुरक्षित और सरकारी मान्यता प्राप्त डिजिटल भुगतान प्रणाली होती है। दिल्ली सरकार इसी तकनीक को राशन वितरण व्यवस्था में इस्तेमाल करने की योजना बना रही है।
बताया जा रहा है कि नई प्रणाली के तहत लाभार्थियों को डिजिटल वॉलेट या विशेष प्लेटफॉर्म के माध्यम से सब्सिडी उपलब्ध कराई जा सकती है। पात्र परिवार इस डिजिटल राशि का उपयोग अधिकृत राशन दुकानों पर खाद्यान्न खरीदने के लिए करेंगे। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि सरकारी मदद सीधे सही व्यक्ति तक पहुंचे।
सरकार का कहना है कि नई तकनीक से पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार में कमी आएगी। साथ ही राशन दुकानों की कार्यप्रणाली पर भी निगरानी मजबूत होगी। यदि कहीं गड़बड़ी होती है तो उसे डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए आसानी से ट्रैक किया जा सकेगा।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि इस व्यवस्था को लागू करने से पहले लोगों को डिजिटल भुगतान और तकनीक के प्रति जागरूक करना जरूरी होगा। खासकर गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि से जुड़े लोगों के लिए प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता अहम भूमिका निभाएगी।
राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर इस पहल को बड़ी सुधारात्मक कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है। सरकार का दावा है कि यह मॉडल लागू होने के बाद राशन वितरण प्रणाली पहले से ज्यादा पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बन सकेगी।
फिलहाल दिल्ली सरकार की इस योजना ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। यदि यह मॉडल सफल साबित होता है, तो आने वाले समय में अन्य राज्यों में भी इसे अपनाने की संभावना बढ़ सकती है।

