दोपहर की तपती धूप, ऊबड़-खाबड़ रास्ते और जंगल के बीच बसी रहस्यमयी बस्ती… सफर जिसने रोंगटे खड़े कर दिए
दोपहर के ठीक 1 बजे का समय। आसमान से आग बरस रही थी और जंगल के बीच से गुजरती कच्ची सड़क पर हमारी कार लगातार हिचकोले खा रही थी। रास्ता इतना खराब था कि हर कुछ मिनट में ऐसा महसूस होता मानो गाड़ी अब पलट जाएगी। चारों तरफ घना जंगल, सूखे पेड़ और दूर-दूर तक इंसानों की कोई मौजूदगी नजर नहीं आ रही थी। तेज गर्मी से गला बार-बार सूख रहा था और पानी की बोतल भी धीरे-धीरे खाली होने लगी थी।
करीब दो घंटे के लंबे और थका देने वाले सफर के बाद अचानक जंगल के बीच कुछ झोपड़ियां दिखाई दीं। यह नजारा किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं था। वीराने के बीच बसी यह छोटी-सी बस्ती देखकर एक पल को यकीन ही नहीं हुआ कि यहां लोग रहते भी होंगे। आसपास न बिजली के खंभे थे, न पक्की सड़क और न ही मोबाइल नेटवर्क का कोई नामोनिशान। सिर्फ मिट्टी से बनी झोपड़ियां और उनके बाहर खेलते कुछ बच्चे नजर आ रहे थे।
जैसे ही कार बस्ती के करीब पहुंची, वहां मौजूद लोग उत्सुकता से हमारी तरफ देखने लगे। उनके चेहरों पर हैरानी साफ दिखाई दे रही थी, क्योंकि बाहरी लोगों का वहां पहुंचना बेहद कम होता है। कुछ महिलाएं मिट्टी के चूल्हे पर खाना बना रही थीं, जबकि बुजुर्ग पेड़ों की छांव में बैठे बातचीत कर रहे थे। बच्चों के चेहरे पर मासूम मुस्कान थी, लेकिन उनकी जिंदगी की मुश्किलें साफ झलक रही थीं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि यह इलाका आज भी बुनियादी सुविधाओं से काफी दूर है। बरसात के दिनों में यहां पहुंचना लगभग नामुमकिन हो जाता है। गांव तक कोई एंबुलेंस नहीं आती और बीमार पड़ने पर लोगों को कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। पीने के पानी के लिए भी ग्रामीणों को जंगल के भीतर बने एक छोटे से स्रोत पर निर्भर रहना पड़ता है।
गांव के एक बुजुर्ग ने बताया कि कई बार सरकारी टीमें यहां पहुंचने का वादा करती हैं, लेकिन हालात अब भी वैसे ही हैं। बच्चों की पढ़ाई भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। स्कूल कई किलोमीटर दूर है और जंगल के रास्ते से होकर जाना पड़ता है। यही वजह है कि कई बच्चे पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं।
हालांकि तमाम परेशानियों के बावजूद इस बस्ती के लोगों के चेहरे पर संतोष नजर आता है। वे जंगल और प्रकृति के बीच अपनी जिंदगी जी रहे हैं। आधुनिक सुविधाओं से दूर होने के बावजूद यहां के लोग आपस में बेहद जुड़े हुए हैं और एक-दूसरे की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।
जंगल के बीच बसी यह बस्ती सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि उन हजारों लोगों की कहानी है जो आज भी विकास की मुख्यधारा से दूर हैं। तपती धूप, कठिन रास्तों और संघर्ष भरी जिंदगी के बीच ये लोग हर दिन उम्मीद के साथ नई सुबह का इंतजार करते हैं।

