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दहेज और प्रताड़ना के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बोला- दुल्हन और उसके परिवार का अपमान अब बर्दाश्त नहीं होगा

दहेज और प्रताड़ना के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बोला- दुल्हन और उसके परिवार का अपमान अब बर्दाश्त नहीं होगा

Supreme Court of India ने दहेज उत्पीड़न और विवाह के बाद महिलाओं के साथ होने वाली प्रताड़ना पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि अब यह स्पष्ट संदेश जाना चाहिए कि दुल्हन और उसके परिवार का अपमान किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी छत्तीसगढ़ के एक मामले की सुनवाई के दौरान की, जिसमें एक महिला ने शादी के महज तीन साल बाद अपने ससुराल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। मामले में महिला के परिजनों ने ससुराल पक्ष पर प्रताड़ना और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।

महिलाओं की गरिमा की रक्षा जरूरी

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि विवाह कोई ऐसा संबंध नहीं है, जहां महिला या उसके परिवार को अपमान और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़े। समाज में महिलाओं की गरिमा और सम्मान की रक्षा करना आवश्यक है और ऐसे मामलों में दोषियों के प्रति नरमी नहीं बरती जानी चाहिए।

समाज को सख्त संदेश देने की जरूरत

अदालत ने कहा कि दहेज और वैवाहिक उत्पीड़न से जुड़े मामलों में न्यायपालिका की जिम्मेदारी केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को स्पष्ट संदेश देना भी जरूरी है कि इस प्रकार के व्यवहार को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ के मामले पर सुनवाई

मामला छत्तीसगढ़ की एक महिला की आत्महत्या से जुड़ा है, जिसने विवाह के तीन वर्ष बाद कथित तौर पर ससुराल में फांसी लगाकर जान दे दी थी। जांच और सुनवाई के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए अपनी टिप्पणी दर्ज की।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना और मानसिक उत्पीड़न के मामलों में एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखी जाएगी।

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