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शासकीय विदेश यात्राओं पर सख्ती, अब केवल जरूरी मामलों में ही मिलेगी अनुमति

शासकीय विदेश यात्राओं पर सख्ती, अब केवल जरूरी मामलों में ही मिलेगी अनुमति

सरकार ने शासकीय खर्च पर होने वाली विदेश यात्राओं को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनका उद्देश्य इन यात्राओं पर नियंत्रण और पारदर्शिता बढ़ाना बताया जा रहा है। नए नियमों के तहत अब केवल अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों में ही विदेश यात्रा की अनुमति दी जाएगी।

निर्देशों के अनुसार, किसी भी सरकारी अधिकारी या प्रतिनिधि को विदेश यात्रा पर जाने से पहले उच्च स्तर पर मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। खास बात यह है कि अब इस तरह की यात्राओं के लिए मुख्यमंत्री की पूर्व स्वीकृति आवश्यक कर दी गई है, जिसके बिना किसी भी प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।

सरकार का कहना है कि कई बार शासकीय कार्यों के नाम पर विदेश यात्राएं होती हैं, जिनकी उपयोगिता और परिणामों पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में यह कदम सार्वजनिक धन के बेहतर उपयोग और अनावश्यक खर्च को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।

नए दिशा-निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि विदेश यात्रा का प्रस्ताव भेजते समय संबंधित विभाग को उसका विस्तृत औचित्य, यात्रा का उद्देश्य, संभावित लाभ और रिपोर्टिंग प्रक्रिया की जानकारी देना अनिवार्य होगा। इसके बाद ही उच्च स्तर पर उसका मूल्यांकन किया जाएगा।

प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से सरकारी तंत्र में अनुशासन बढ़ेगा और केवल उन्हीं यात्राओं को मंजूरी मिलेगी जो वास्तव में नीतिगत या विकासात्मक दृष्टि से आवश्यक होंगी।

इसके साथ ही सरकार यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि विदेश यात्राओं के परिणामों की समीक्षा समय-समय पर की जाए, ताकि यह पता चल सके कि उनसे वास्तव में कितना लाभ हुआ है।

फिलहाल इस फैसले को सरकारी खर्च में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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