Samachar Nama
×

पद्म विभूषण तीजन बाई का निधन, 70 वर्ष की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा; सीएम विष्णु देव साय ने जताया शोक

पद्म विभूषण तीजन बाई का निधन, 70 वर्ष की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा; सीएम विष्णु देव साय ने जताया शोक

छत्तीसगढ़ की महान लोक गायिका और पंडवानी कला की विश्व प्रसिद्ध कलाकार तीजन बाई का निधन हो गया है। वह 70 वर्ष की थीं। लंबे समय से बीमार चल रहीं तीजन बाई का इलाज एम्स रायपुर में चल रहा था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश के कला और संस्कृति जगत में शोक की लहर फैल गई है।

तीजन बाई ने अपनी अनोखी गायन शैली और दमदार प्रस्तुति से छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोक कला पंडवानी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई थी। उन्होंने महाभारत की कथाओं को अपनी आवाज और अभिनय के माध्यम से जीवंत कर दिया था। उनकी कला ने भारतीय लोक संस्कृति को दुनिया के मंच तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जताया दुख

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि तीजन बाई का निधन राज्य की सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तीजन बाई ने अपनी प्रतिभा और साधना से छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं को देश-दुनिया में गौरव दिलाया। उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिवार को यह दुख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की।

पंडवानी को दिलाई नई पहचान

तीजन बाई का नाम भारतीय लोक कला के सबसे बड़े कलाकारों में शामिल रहा है। उन्होंने पंडवानी गायन की ऐसी शैली विकसित की, जिसमें कथा वाचन, अभिनय और संगीत का अद्भुत मेल देखने को मिलता था।

उनकी प्रस्तुतियों में महाभारत के प्रसंग जीवंत हो उठते थे। देश के अलावा विदेशों में भी उन्होंने कई मंचों पर प्रस्तुति देकर भारतीय लोक संस्कृति की छाप छोड़ी।

कई बड़े सम्मानों से हुईं सम्मानित

तीजन बाई को कला के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने कई प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया। उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से नवाजा गया था।

इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित कई अन्य पुरस्कार भी मिले। वह छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का एक मजबूत स्तंभ मानी जाती थीं।

लोक कला जगत में शोक की लहर

तीजन बाई के निधन की खबर के बाद कलाकारों, साहित्यकारों और संस्कृति प्रेमियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। लोगों ने कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन लोक कला और परंपराओं को समर्पित कर दिया।

उनकी आवाज, उनकी शैली और पंडवानी के प्रति उनका समर्पण हमेशा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा। तीजन बाई के जाने से भारतीय लोक संगीत के क्षेत्र में एक ऐसा खालीपन पैदा हुआ है, जिसे भरना बेहद मुश्किल होगा।

Share this story

Tags