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बुजुर्ग सास को बैंक पहुंचाने के लिए पहाड़ों से गुजरती महिला, मैनपाट से सामने आई संघर्ष की कहानी

बुजुर्ग सास को बैंक पहुंचाने के लिए पहाड़ों से गुजरती महिला, मैनपाट से सामने आई संघर्ष की कहानी

छत्तीसगढ़ के Mainpat विकासखंड से संघर्ष और मजबूरी की मार्मिक तस्वीर सामने आई है। जानकारी के मुताबिक कुनिया ग्राम पंचायत निवासी Sukhmuniya Bai अपनी बुजुर्ग सास को बैंक तक पहुंचाने के लिए कठिन पहाड़ी और दुर्गम रास्तों से पैदल सफर करने को मजबूर है।

बताया जा रहा है कि गांव में बैंकिंग सुविधाएं दूर होने और परिवहन व्यवस्था कमजोर होने के कारण सुखमुनिया बाई को अपनी वृद्ध सास को लेकर कई किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है। रास्ता ऊबड़-खाबड़ और पहाड़ी होने से यह सफर बेहद कठिन हो जाता है, खासकर बुजुर्ग महिला के लिए।

स्थानीय लोगों के अनुसार क्षेत्र में सड़क और परिवहन सुविधाओं की कमी के चलते ग्रामीणों को रोजमर्रा के जरूरी कामों के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बैंक, अस्पताल और सरकारी दफ्तरों तक पहुंचने में घंटों लग जाते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक दिक्कत होती है। कई बार पेंशन या बैंक संबंधी काम के लिए लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। बारिश के मौसम में हालात और ज्यादा खराब हो जाते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि दूरदराज के आदिवासी और पहाड़ी क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं की कमी आज भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। सड़क, परिवहन और डिजिटल बैंकिंग सुविधाओं के अभाव में ग्रामीणों को काफी संघर्ष करना पड़ता है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि ऐसे क्षेत्रों में मोबाइल बैंकिंग, ग्रामीण बैंक सेवाएं और बेहतर सड़क सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं ताकि लोगों को बुनियादी सेवाओं के लिए कठिन सफर न करना पड़े।

यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और सुविधाओं की वास्तविक स्थिति को भी उजागर करती है। सरकार की कई योजनाओं के बावजूद दूरस्थ इलाकों में रहने वाले लोगों को आज भी बैंकिंग और स्वास्थ्य जैसी जरूरी सेवाओं तक पहुंचने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

फिलहाल सुखमुनिया बाई की यह कहानी सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग इसे ग्रामीण जीवन की कठिनाइयों और प्रशासनिक चुनौतियों की बड़ी मिसाल मान रहे हैं।

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