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PMCH में होगी जूनोटिक बीमारियों की जांच, NCDC के साथ हुआ MOU, बिहार को मिलेगी बड़ी सुविधा

PMCH में होगी जूनोटिक बीमारियों की जांच, NCDC के साथ हुआ MOU, बिहार को मिलेगी बड़ी सुविधा

पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) में अब जानवरों से इंसानों में फैलने वाली संक्रामक बीमारियों यानी जूनोटिक डिजीज की जांच की जाएगी। इसके लिए केंद्र सरकार ने पीएमसीएच के माइक्रोबायोलॉजी विभाग का चयन किया है।

सोमवार को राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) और पीएमसीएच के बीच इस संबंध में समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस पहल के बाद बिहार में जूनोटिक रोगों की पहचान, लैब जांच और निगरानी व्यवस्था पहले से अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।

माइक्रोबायोलॉजी विभाग को मिली जिम्मेदारी

पीएमसीएच के माइक्रोबायोलॉजी विभाग को जूनोटिक बीमारियों की जांच के लिए चयनित किया गया है। विभाग अब इन संक्रमणों की पहचान के लिए अत्याधुनिक जांच प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था को आगे बढ़ाएगा।

माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रतुल्य नंदन ने बताया कि इस पहल से बिहार में जूनोटिक रोगों की पहचान और नियंत्रण में काफी मदद मिलेगी।

समय पर इलाज और संक्रमण रोकने में मिलेगी मदद

डॉ. प्रतुल्य नंदन के अनुसार, जूनोटिक बीमारियों की समय पर पहचान होने से मरीजों का इलाज जल्द शुरू किया जा सकेगा। साथ ही संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने में भी सहायता मिलेगी।

उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था के तहत संदिग्ध मामलों की बेहतर निगरानी और सटीक लैब जांच संभव हो पाएगी।

क्या होती हैं जूनोटिक बीमारियां?

जूनोटिक डिजीज वे संक्रामक बीमारियां होती हैं, जो जानवरों से इंसानों में फैल सकती हैं। इनमें कई तरह के वायरल, बैक्टीरियल और अन्य संक्रमण शामिल होते हैं। इनकी समय पर पहचान संक्रमण को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

PMCH और NCDC के बीच हुए इस समझौते को बिहार में स्वास्थ्य निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इससे राज्य में भविष्य में सामने आने वाले संक्रमणों की पहचान और नियंत्रण में तेजी आएगी।

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