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बिहार विधानसभा में MLA फंड बढ़ाने को लेकर हंगामा — विधायक 10 मिनट तक खड़े रहे, कार्यवाही रुकी

बिहार विधानसभा में MLA फंड बढ़ाने को लेकर हंगामा — विधायक 10 मिनट तक खड़े रहे, कार्यवाही रुकी

बिहार विधानसभा के बजट सत्र 2026 के दौरान आज सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला जब विधायकों ने अपने स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (MLA Fund) को बढ़ाने की मांग जोर‑शोर से उठाई। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के सभी विधायकों ने लगभग 10 मिनट तक अपनी सीटों से खड़े रहकर विरोध जताया, जिससे सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए रुक गई।

मांग क्या थी?

वर्तमान में बिहार में प्रत्येक विधायक को वर्षाना 4 करोड़ रुपये का स्थानीय क्षेत्र विकास निधि मिलता है, जिसे वे अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए खर्च कर सकते हैं। लेकिन अन्य राज्यों से तुलना करने पर यह राशि कम लग रही है। खासी संख्या में विधायकों ने यह मांग उठाई कि निधि को ₹5 करोड़ कर दिया जाए, ताकि स्थानीय स्तर पर विकास कार्य और बेहतर तरीके से किया जा सके।

बीजेपी के विधायक प्रमोद कुमार ने सदन में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि बिहार में आज की महंगाई, निर्माण सामग्री की बढ़ी कीमतों और विकास की जरूरतों को देखते हुए निधि बढ़ाई जानी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली, राजस्थान सहित कई अन्य राज्यों में विधायकों को ₹5 करोड़ या उससे ऊपर की निधि मिलती है, जबकि बिहार में अभी ₹4 करोड़ ही है।

संसद की कार्यवाही पर असर

जब विधायक अपने‑अपने स्थानों से खड़े होकर फंड बढ़ाने की मांग करने लगे, तब स्पीकर प्रेम कुमार ने बार‑बार विधायकों से बैठने का अनुरोध किया, लेकिन विधायक लगभग 10 मिनट तक खड़े रहे। इस दौरान सदन की प्रक्रिया प्रभावित हुई और कामकाज लगभग 5 मिनट के लिए स्थगित रही। उक्त हंगामे की वजह से सदन में गंभीर राजनीतिक बहस और शोर‑शराबा देखने को मिला।

सरकार का रुख

सरकार की ओर से वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि यदि मध्यप्रदेश समेत अन्य राज्यों में सांसदों की निधि बढ़ाई जाती है और केंद्र भी इस दिशा में कदम उठाए, तो बिहार में भी निधि बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट नहीं किया कि यह कब लागू हो पाएगा। मंत्री के इस जवाब से कुछ विधायकों का असंतोष कम हुआ, लेकिन वे फिर भी अपनी मांग पर डटे रहे।

विधायकों की एकमत प्रतिक्रिया

सत्ता‑विपक्ष दोनों ही दलों के कई विधायक विधायकों को मिलने वाले फंड को बढ़ाने पर सहमत दिखाई दिए। इस मसले पर भाजपा, जेडीयू, राजद तथा अन्य छोटे दलों के विधायक एक साथ खड़े होकर अपनी आवाज़ बुलंद करते रहे। कई ने यह भी कहा कि स्थानीय विकास में निधि का बड़ा रोल है और वर्तमान वित्तीय वर्ष में बढ़ती आवश्यकताओं को देखते हुए राशि बढ़ाई जानी चाहिए।

क्या निर्णय होगा निधि बढ़ाने का?

हालांकि सरकार ने कहा है कि निधि बढ़ाने की मांग पर विचार किया जाएगा, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है कि इसे कब बढ़ाया जाएगा या बढ़ेगा भी या नहीं। प्रदेश के कुछ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सरकार फ़िलहाल ₹4 करोड़ की निधि पर ही कायम रहने का निर्णय ले सकती है, क्योंकि इसकी वित्तीय क्षमता को लेकर चिंताएँ हैं।

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