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नालंदा में अनोखी ठगी: “गर्भवती बनाओ, 12 लाख पाओ”… 5 आरोपी गिरफ्तार

नालंदा में अनोखी ठगी: “गर्भवती बनाओ, 12 लाख पाओ”… 5 आरोपी गिरफ्तार

बिहार के नालंदा जिले के कतरीसराय क्षेत्र से एक हैरान कर देने वाला फ्रॉड मामला सामने आया है, जिसमें लोगों को महिलाओं को गर्भवती कराने के लिए लाखों रुपये देने का झांसा देकर ठगी की गई। पुलिस ने इस मामले में 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

ठगी का हैरान करने वाला तरीका

पुलिस की प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि ठगों ने व्हाट्सएप और सोशल मीडिया के ज़रिये पुरुषों और महिलाओं को इस विश्वास के साथ लुभाया कि यदि वे किसी महिला को गर्भवती करा देंगे तो उन्हें 10 से 12 लाख रुपये तक का भुगतान किया जाएगा। आरोपियों ने यह भी दावा किया कि वार्षिक वेतन के साथ-साथ अन्य भत्तों के रूप में भी भारी रकम दी जाएगी।

इस तरह के “गर्भवती जॉब” के ऑफ़र पहले से ही देश के कुछ इलाकों में सामने आ चुके हैं, लेकिन नालंदा में पुलिस की गिरफ्त में आया गिरोह इन ऑनलाइन ठगी योजनाओं को और आगे ले जा रहा था।

कैसे होता था फ्रॉड

पुलिस की जानकारी के मुताबिक, आरोपियों ने विभिन्न समूह बनाए थे जिनमें अभी कई अन्य महिलाओं को भी शामिल किया गया था जो संभावित पीड़ितों से बात कर उन्हें भरोसा दिलाते थे। इसके बाद परिवार या व्यक्ति से छोटे‑छोटे फ़ीस के नाम पर रुपये लिए जाते थे, जैसे “रजिस्ट्रेशन शुल्क”, “परीक्षण शुल्क” या “दस्तावेज़ीकरण खर्च” आदि। पैसा मिलने के बाद आरोपी गुम हो जाते थे।

अभियुक्त व्हाट्सएप कॉल और मैसेज के माध्यम से संपर्क करते थे और भरोसा दिलाते थे कि इस योजना से महिलाओं को गर्भधारण कराकर आश्चर्यजनक रूप से बड़ी रकम मिल सकती है। कई पीड़ितों ने शर्म और भय के कारण पुलिस को शिकायत दर्ज कराने में देरी भी की, जिससे आरोपियों को काम करने का मौका मिला।

पुलिस ने कैसे पकड़ा गिरोह

नालंदा पुलिस ने स्थानीय शिकायतों के आधार पर जांच शुरू की और धीरे‑धीरे इस गिरोह के नेटवर्क का रेखांकन किया। सूत्रों की मानें तो एक मुखबिर की सूचना के बाद पुलिस ने छापा मारा और पाँच मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में पुरुष और महिला दोनों शामिल हैं। पुलिस ने इस गिरोह से जुड़े कई मोबाइल फोन, व्हाट्सएप चैट रिकॉर्ड और अन्य सबूत भी जब्त किए हैं।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जांच अभी जारी है और अगर और भी शिकायतें मिलती हैं तो आगे गिरफ्तारियाँ भी हो सकती हैं। उन्होंने लोगों से ऐसे ऑफ़र्स के प्रति सावधान रहने की अपील भी की है, खासकर उन योजनाओं से जो बिना किसी ठोस जानकारी के “असामान्य लाभ” का वादा करती हैं।

समाज पर इसके प्रभाव

विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह की ठगी न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाती है, बल्कि सामाजिक रूप से भी लोगों में भ्रम, भय और अविश्वास की भावना पैदा करती है। ऐसे झांसे में आने वाले लोग अक्सर अपने निजी डेटा जैसे आधार, पैन और बैंक जानकारी भी साझा कर देते हैं, जो आगे किसी साइबर फ्रॉड का कारण बन सकता है।

इस तरह के मामलों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैलने वाली झूठी जानकारी और आकर्षक ऑफ़र्स मुख्य भूमिका निभाते हैं, जिससे नियमित जनमानस लुभानें में आ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि लोग किसी भी ऑफ़र को स्वीकारने से पहले जरूर जांच करें और संदिग्ध लगने पर तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर सेल को सूचित करें।

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