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केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने बिहार की शराबबंदी नीति पर उठाए गंभीर सवाल

केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने बिहार की शराबबंदी नीति पर उठाए गंभीर सवाल

केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने बिहार की शराबबंदी नीति पर गंभीर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इसके क्रियान्वयन की समीक्षा करने और नीति के प्रभाव का विस्तृत मूल्यांकन करने की मांग की है। उन्होंने इस दौरान राज्य में नीति के पालन में गड़बड़ियों, आर्थिक नुकसान और गरीब जनता पर पड़ रहे दुष्प्रभाव को विशेष रूप से रेखांकित किया।

मांझी ने बताया कि बिहार में शराबबंदी लागू होने के बावजूद छह लाख मामलों में से लगभग चार लाख मामले अनुसूचित जाति के लोगों के खिलाफ दर्ज हैं। उन्होंने इसे समाज के कमजोर वर्गों पर असमान प्रभाव वाला बताया और कहा कि नीति के उचित क्रियान्वयन की आवश्यकता है।

केंद्रीय मंत्री ने इस मुद्दे को लेकर राज्य के गृह मंत्री सम्राट चौधरी से भी ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि शराबबंदी का उद्देश्य समाज को सुरक्षित और स्वस्थ बनाना है, लेकिन वर्तमान स्थिति में यह गरीब और पिछड़े वर्गों पर disproportionately प्रभाव डाल रही है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इसके क्रियान्वयन में सुधार किया जाए और न्यायसंगत कदम उठाए जाएं।

विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार की शराबबंदी नीति लागू होने के बाद कानून व्यवस्था में कुछ सुधार तो हुए हैं, लेकिन सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से नीति का असर विवादास्पद रहा है। उन्हें यह चिंता है कि नीति के अनुपालन में असमानता और प्रशासनिक गड़बड़ियां कमजोर वर्गों को असमय पीड़ा पहुंचा रही हैं।

मांझी ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल आलोचना करना नहीं है, बल्कि सरकार से इस दिशा में ठोस कदम उठाने और नीति के प्रभाव का समीक्षा और सुधार करने का अनुरोध करना है। उन्होंने कहा कि नीति का उद्देश्य राज्यवासियों के हित में होना चाहिए, न कि गरीब और पिछड़े वर्गों के खिलाफ।

राज्य सरकार ने फिलहाल मांझी के बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन इस मुद्दे को विधानसभा और संबंधित विभागों में गंभीरता से देखा जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि आगामी दिनों में नीति के प्रभाव और सुधार पर विस्तृत बहस की संभावना है।

इस पहल से स्पष्ट होता है कि शराबबंदी जैसी संवेदनशील नीतियों के कार्यान्वयन में सामाजिक न्याय, आर्थिक पहलू और वर्ग विशेष पर प्रभाव को ध्यान में रखना आवश्यक है। जीतन राम मांझी की अपील राज्य सरकार के लिए इस नीति की समीक्षा और सुधार का संकेत है।

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