महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार को गयाजी में दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि
महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री और एनसीपी के वरिष्ठ नेता अजित पवार को गया में भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। परिवार की इच्छा के अनुसार मोक्ष नगरी गया में आयोजित यह धार्मिक अनुष्ठान समाज और राजनीतिक जगत के लिए एक भावुक क्षण बन गया।
श्रद्धांजलि सभा एनसीपी के राष्ट्रीय सचिव राणा रणवीर सिंह की अध्यक्षता में आयोजित की गई, जिसमें पार्टी के कई कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। सभा के दौरान नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अजित पवार को अंतिम प्रणाम अर्पित किया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने उनके योगदान और पार्टी के प्रति समर्पण को याद किया।
इस धार्मिक अनुष्ठान में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ फल्गु नदी में अजित पवार की अस्थियों का विसर्जन किया गया। इसके साथ ही पिंडदान भी संपन्न हुआ। आयोजन में शामिल लोगों ने बताया कि इस अनुष्ठान के दौरान कई लोग भावुक हो उठे और नेताओं तथा कार्यकर्ताओं ने उन्हें सांत्वना दी।
पंडितों के मार्गदर्शन में संपन्न हुए इस अनुष्ठान का उद्देश्य शांति और मोक्ष की प्राप्ति है। परिवार ने इसे खास तौर पर मोक्ष नगरी गया में संपन्न कराने की इच्छा जताई थी, ताकि परंपराओं और धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार किया जा सके।
एनसीपी कार्यकर्ताओं ने कहा कि अजित पवार की याद में यह सभा उनके योगदान और पार्टी के प्रति उनके समर्पण को सम्मान देने का अवसर थी। उन्होंने नेताओं और कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे उनके आदर्शों और विचारों को आगे बढ़ाएं।
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने भी इस अवसर पर भाग लिया। उन्होंने कहा कि धार्मिक अनुष्ठानों के साथ राजनीतिक हस्तियों को श्रद्धांजलि देने की यह परंपरा समाज में एकता और सम्मान की भावना को बढ़ावा देती है।
इस अवसर पर राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि अजित पवार की छवि एक अनुकरणीय नेता के रूप में हमेशा याद रखी जाएगी। उनके योगदान और समाज के प्रति समर्पण को आने वाली पीढ़ियां भी याद रखेंगी।
श्रद्धांजलि सभा के दौरान उपस्थित लोग और नेताओं ने यह भी कहा कि इस तरह के आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि यह समाज में संवेदनशीलता और एकता को भी मजबूत करते हैं।
फल्गु नदी के किनारे संपन्न हुए इस धार्मिक अनुष्ठान ने सभी उपस्थित लोगों के दिलों को छू लिया। लोगों ने कहा कि यह क्षण अजित पवार के प्रति सम्मान और श्रद्धा व्यक्त करने का एक यादगार अवसर रहा।
इस प्रकार गया में संपन्न हुए धार्मिक अनुष्ठान ने यह संदेश दिया कि राजनीतिक और सामाजिक जीवन में योगदान देने वाले नेताओं को सम्मान देने की परंपरा हमेशा जीवित रहेगी।

