Samachar Nama
×

शिक्षक कोटे की चारों सीटों पर मौजूदा MLC हारे

शिक्षक कोटे की चारों सीटों पर मौजूदा MLC हारे

चुनाव का सबसे चौंकाने वाला पहलू शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में देखने को मिला। पटना शिक्षक सीट पर भाजपा के वरिष्ठ नेता नवल किशोर यादव को आरजेडी के डॉ. संजीव कुमार ने हराया। दरभंगा शिक्षक सीट पर कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा को जन सुराज के सुरेश प्रसाद राय ने शिकस्त दी। तिरहुत शिक्षक सीट पर भाजपा के नरेंद्र प्रसाद सिंह ने CPI के संजय कुमार सिंह को हराया। सारण शिक्षक सीट पर निर्दलीय राहुल राज ने जीत दर्ज की। इस तरह शिक्षक कोटे की चारों सीटों पर मौजूदा एमएलसी अपनी सीट नहीं बचा सके।

स्नातक सीटों पर पुराने चेहरों का दबदबा

शिक्षक सीटों के उलट स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मौजूदा एमएलसी अपनी सीट बचाने में सफल रहे। पटना स्नातक सीट पर जेडीयू के नीरज कुमार ने लगातार चौथी बार जीत दर्ज की। उनके खिलाफ जन सुराज के अनूज सिंह को समर्थन देने वाले मोकामा विधायक अनंत सिंह को पार्टी ने छह साल के लिए निलंबित कर दिया था। नीरज कुमार की जीत के बाद इस सियासी टकराव की भी चर्चा तेज हो गई।

कोसी स्नातक सीट पर भाजपा के एनके यादव ने लगातार तीसरी जीत दर्ज की। दरभंगा स्नातक सीट पर भाजपा के सर्वेश कुमार ने आरजेडी के अनिल कुमार झा को 237 मतों से हराया। वहीं, तिरहुत स्नातक सीट पर निर्दलीय बंशीधर ब्रजवासी ने जेडीयू समर्थित उम्मीदवार अभिषेक झा को 5,705 मतों से पराजित किया।

एनडीए को चार सीटें, जन सुराज की पहली एंट्री

आठ सीटों के अंतिम परिणामों में भाजपा ने तीन सीटें जीतीं, जबकि जेडीयू को एक सीट मिली। इस तरह एनडीए के खाते में कुल चार सीटें आईं। आरजेडी और जन सुराज ने एक-एक सीट जीती, जबकि दो सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे। जन सुराज के लिए दरभंगा शिक्षक सीट की जीत खास रही, क्योंकि इसके साथ पार्टी ने पहली बार बिहार विधान परिषद में प्रवेश किया।

कांग्रेस और CPI का प्रतिनिधित्व खत्म

इन नतीजों से कांग्रेस और CPI को बड़ा नुकसान हुआ। दोनों पार्टियां अपनी-अपनी शिक्षक सीटें नहीं बचा सकीं। खासकर CPI की हार के साथ विधान परिषद में उसका एकमात्र प्रतिनिधित्व समाप्त हो गया। दूसरी ओर, आरजेडी को पटना शिक्षक सीट पर जीत से राहत मिली। कुल मिलाकर, बिहार विधान परिषद चुनाव में शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में बड़ा उलटफेर हुआ, जबकि स्नातक सीटों पर पुराने प्रतिनिधियों का दबदबा कायम रहा।

Share this story

Tags