फर्जी आधार बनाने का नेटवर्क कई जिलों तक फैला, एजाज के ऑपरेटर पर मशीन और लॉगिन-पासवर्ड देने का आरोप
बिहार में फर्जी आधार कार्ड बनाने से जुड़े मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इसका नेटवर्क कई जिलों तक फैला होने की बात सामने आ रही है। जांच में मुजफ्फरपुर के अलावा पटना, हाजीपुर, खगड़िया समेत कई अन्य जिलों का नाम सामने आया है। आरोप है कि एजाज ने अपने ऑपरेटर के माध्यम से आधार बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली मशीनें और लॉगिन-पासवर्ड उपलब्ध कराए। इन संसाधनों का कथित तौर पर इस्तेमाल हजारों फर्जी आधार कार्ड तैयार करने में किया गया।
मशीन और लॉगिन-पासवर्ड उपलब्ध कराने का आरोप
जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार, फर्जी आधार तैयार करने के लिए बाकायदा तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल किया गया। एजाज के ऑपरेटर पर अलग-अलग स्थानों पर मशीन और लॉगिन-पासवर्ड उपलब्ध कराने का आरोप है। इसके जरिए आधार नामांकन और उससे जुड़ी प्रक्रिया का गलत तरीके से इस्तेमाल किए जाने की आशंका जताई जा रही है।
मामले की जांच कर रही एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कितनी मशीनें अलग-अलग लोगों तक पहुंचाई गईं और किन-किन स्थानों पर इनका इस्तेमाल किया गया। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि इन लॉगिन और पासवर्ड का इस्तेमाल किन लोगों ने किया।
कई जिलों में फैला नेटवर्क
फर्जी आधार बनाने का मामला केवल मुजफ्फरपुर तक सीमित नहीं दिखाई दे रहा है। पटना, हाजीपुर और खगड़िया समेत कई जिलों में इस नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। अलग-अलग जगहों पर मशीन उपलब्ध कराए जाने की जानकारी सामने आने के बाद जांच का दायरा भी बढ़ सकता है।
जांच एजेंसियां अब उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं, जिन्होंने कथित तौर पर इन मशीनों और लॉगिन-पासवर्ड का इस्तेमाल किया। इसके साथ ही यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने के लिए किन पहचान संबंधी जानकारियों का इस्तेमाल किया गया।
हजारों फर्जी आधार बनाए जाने का दावा
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, इस नेटवर्क के जरिए हजारों फर्जी आधार कार्ड बनाए जाने की आशंका है। अगर जांच में यह आरोप सही साबित होता है तो यह मामला बड़े स्तर पर पहचान दस्तावेजों के दुरुपयोग से जुड़ा हो सकता है।
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि फर्जी आधार बनवाने वाले लोगों से किस तरह संपर्क किया जाता था और इसके बदले उनसे कितनी रकम ली जाती थी। संभावित वित्तीय लेनदेन और अन्य डिजिटल गतिविधियों की भी पड़ताल की जा सकती है।
जांच एजेंसियों की बढ़ी सक्रियता
मामले में अब जांच का फोकस केवल फर्जी आधार तैयार करने वालों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने पर है। मशीन उपलब्ध कराने वाले ऑपरेटर, लॉगिन-पासवर्ड का इस्तेमाल करने वाले लोग और फर्जी आधार बनवाने वाले व्यक्तियों के बीच संबंधों की जांच की जा रही है।
अधिकारियों की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे और कितने फर्जी आधार वास्तव में बनाए गए। फिलहाल सामने आए आरोपों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है और संबंधित लोगों की भूमिका की पुष्टि की जा रही है

