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विकास योजनाओं में ढिलाई नहीं चाहती बिहार सरकार, मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों को जिलों का प्रभार सौंपा गया

विकास योजनाओं में ढिलाई नहीं चाहती बिहार सरकार, मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों को जिलों का प्रभार सौंपा गया

बिहार सरकार प्रदेश में विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से जमीन पर उतारने के लिए पूरी तरह गंभीर नजर आ रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार ने एक अहम प्रशासनिक फैसला लेते हुए मंत्रियों को जिलों का प्रभार सौंप दिया है। इसके साथ ही विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सचिव स्तर के अधिकारियों को भी अलग-अलग जिलों का प्रभारी सचिव नियुक्त किया गया है। सरकार का उद्देश्य साफ है कि योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी में किसी तरह की कोताही या समन्वय की कमी न रहे।

सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार, मंत्रियों को उनके प्रभार वाले जिलों में विकास योजनाओं, कल्याणकारी कार्यक्रमों और सरकारी योजनाओं की नियमित समीक्षा करनी होगी। मंत्री अपने-अपने जिलों में जाकर योजनाओं की प्रगति का जायजा लेंगे और जरूरत पड़ने पर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी देंगे। इससे प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ेगी और योजनाओं का लाभ आम जनता तक समय पर पहुंच सकेगा।

वहीं दूसरी ओर, सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर भी मजबूत व्यवस्था की है। राज्य के विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सचिवों को जिलों का प्रभारी सचिव बनाया गया है। इन अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि वे अपने प्रभार वाले जिलों में योजनाओं के क्रियान्वयन, बजट खर्च, गुणवत्ता और समयसीमा पर विशेष नजर रखें। साथ ही जिला प्रशासन और राज्य मुख्यालय के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करें।

सरकार का मानना है कि मंत्री और प्रभारी सचिव के संयुक्त समन्वय से विकास कार्यों में तेजी आएगी। अक्सर योजनाओं के क्रियान्वयन में विभागीय तालमेल की कमी एक बड़ी समस्या बन जाती है, लेकिन इस नई व्यवस्था से कोऑर्डिनेशन से जुड़ी दिक्कतों को काफी हद तक दूर किया जा सकेगा।

बिहार सरकार की ओर से मंत्रियों और प्रभारी सचिवों की पूरी सूची जारी कर दी गई है। इस सूची में स्पष्ट किया गया है कि किस मंत्री और किस वरिष्ठ अधिकारी को कौन-सा जिला सौंपा गया है। आदेश में यह भी कहा गया है कि प्रभारी मंत्री और प्रभारी सचिव नियमित रूप से जिलों का दौरा करेंगे और प्रगति रिपोर्ट सरकार को सौंपेंगे।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस फैसले के पीछे सरकार की मंशा आगामी योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की है। सड़क, पुल, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, आवास और रोजगार से जुड़ी योजनाओं पर विशेष फोकस रहेगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि योजनाओं में किसी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार न हो।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह फैसला सरकार की विकासोन्मुखी सोच को दर्शाता है। मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की सीधी जिम्मेदारी तय होने से न केवल निगरानी मजबूत होगी, बल्कि जनता की शिकायतों का समाधान भी तेजी से हो सकेगा।

कुल मिलाकर, बिहार सरकार का यह कदम प्रशासनिक कसावट और विकास कार्यों में गति लाने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है। आने वाले समय में इसका असर जमीनी स्तर पर कितना दिखता है, इस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

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