खाड़ी देशों के तनाव का असर भारत में कैंसर इलाज पर, कीमोथेरेपी दवाओं की कीमतें दोगुनी से ज्यादा बढ़ीं
खाड़ी देशों में जारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन में आई बाधाओं का असर अब भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र पर भी पड़ने लगा है। कैंसर मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली जीवनरक्षक कीमोथेरेपी दवाओं की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिल रहा है। कई महत्वपूर्ण दवाओं के दाम दोगुने से भी ज्यादा बढ़ गए हैं, जिससे मरीजों और उनके परिवारों की आर्थिक मुश्किलें बढ़ गई हैं।
कैंसर का इलाज पहले से ही काफी महंगा माना जाता है। ऐसे में दवाओं की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी ने मरीजों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। खासकर वे परिवार जो लंबे समय से इलाज का खर्च उठा रहे हैं, उनके लिए बढ़ी हुई कीमतें चिंता का कारण बन गई हैं।
सप्लाई चेन प्रभावित होने से बढ़ी कीमतें
स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, खाड़ी देशों में चल रहे संघर्ष और वैश्विक स्तर पर परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने से कई जरूरी दवाओं के कच्चे माल और आयात-निर्यात प्रक्रिया पर असर पड़ा है। इसके कारण कुछ कीमोथेरेपी दवाओं की उपलब्धता कम हुई और कीमतों में तेजी आई।
कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कई दवाएं विदेशों से आने वाले कच्चे माल पर निर्भर होती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव का सीधा असर इन दवाओं की लागत पर पड़ता है।
मरीजों के परिवारों पर बढ़ा आर्थिक दबाव
कीमोथेरेपी लंबे समय तक चलने वाली प्रक्रिया होती है, जिसमें मरीजों को कई चक्रों में दवाएं दी जाती हैं। ऐसे में दवाओं की कीमत बढ़ने से इलाज का कुल खर्च काफी बढ़ गया है।
मरीजों के परिजनों का कहना है कि पहले ही अस्पताल, जांच और इलाज पर बड़ी रकम खर्च हो रही थी, अब दवाओं के बढ़े हुए दामों ने परेशानी और बढ़ा दी है। कई परिवारों को इलाज जारी रखने के लिए आर्थिक मदद की जरूरत पड़ रही है।
विशेषज्ञों ने जताई चिंता
कैंसर विशेषज्ञों का कहना है कि जरूरी दवाओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी गंभीर चिंता का विषय है। उनका मानना है कि सरकार और संबंधित एजेंसियों को ऐसी जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता और कीमतों पर नजर रखने की जरूरत है, ताकि मरीजों को इलाज में परेशानी न हो।
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि दवा बाजार में स्थिरता बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में इलाज रोकना मरीजों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।
सरकार की भूमिका अहम
स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच भारत को जरूरी दवाओं की आपूर्ति बनाए रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर काम करना होगा। साथ ही मरीजों को राहत देने के लिए कीमतों की निगरानी और सहायता योजनाओं को मजबूत करने की जरूरत है।
फिलहाल कैंसर मरीज और उनके परिवार बढ़ती दवा कीमतों से परेशान हैं। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय हालात और सप्लाई चेन की स्थिति पर निर्भर करेगा कि दवाओं की कीमतों में कितनी स्थिरता आती है।

