तेजस्वी यादव ने अमित शाह के दौरे के बाद घुसपैठ और अपराध को चुनावी मुद्दा बनाया
बिहार में विपक्षी नेता तेजस्वी यादव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया दौरे के बाद राज्य में बढ़ती घुसपैठ, अपराध और हत्याओं को चुनावी मुद्दा बनाते हुए सरकार पर जोरदार हमला किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार सबसे कमजोर स्थिति में है और राज्य की कानून व्यवस्था पूरी तरह विफल हो चुकी है।
तेजस्वी यादव ने संवाददाताओं से कहा कि बिहार में लगातार बढ़ते अपराध और हत्या की घटनाएं नागरिकों की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार घुसपैठ, अवैध हथियार और मादक पदार्थ के मामलों में कारगर कार्रवाई करने में विफल रही है।
उन्होंने कहा, “अमित शाह के दौरे के बाद भी बिहार में अपराधियों पर नियंत्रण नहीं है। सरकार केवल दिखावे के लिए बयान देती है, लेकिन वास्तविक कार्रवाई नहीं होती। नीतीश कुमार सबसे कमजोर स्थिति में हैं और उनकी प्रशासनिक नाकामी का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।”
तेजस्वी यादव ने आगे कहा कि यह मुद्दा केवल राजनीतिक बयानबाजी का विषय नहीं है, बल्कि राज्य की जनता की सुरक्षा और कानून व्यवस्था का गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि जनता अब चुनाव में इस आधार पर सरकार की नाकामी और विपक्ष की भूमिका का आंकलन करेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार जैसे राज्य में चुनाव से पहले कानून और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को सामने लाना आम राजनीतिक रणनीति होती है। इसके जरिए विपक्ष अपनी चुनावी पकड़ मजबूत करता है और सरकार को दबाव में लाता है।
नीतीश कुमार और उनकी सरकार ने अब तक इस आरोप पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि राज्य में कानून व्यवस्था में सुधार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और पुलिस बल को सुदृढ़ किया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अमित शाह का दौरा और इसके बाद तेजस्वी यादव के बयान से चुनावी राजनीति में घुसपैठ और अपराध जैसे मुद्दे प्रमुखता से उभर सकते हैं। इससे जनता में सुरक्षा और विकास को लेकर संदेह और चर्चा दोनों बढ़ने की संभावना है।
इस प्रकार, बिहार में तेजस्वी यादव का बयान राज्य की राजनीति में एक नया चुनावी मोड़ ला सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी चुनाव में सरकार की नाकामी और विपक्ष की सक्रियता जनता के सामने मुख्य मुद्दा रहेगी।
तेजस्वी यादव के हमले ने राज्य सरकार पर कड़ा दबाव डाल दिया है, और अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस आरोप का सामना कैसे करती है और कानून व्यवस्था में सुधार के लिए क्या कदम उठाती है।

