बिहार में शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा, लेकिन 7वें वेतनमान का लाभ नहीं; उठे सवाल
बिहार में शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा मिलने के बाद भी वेतन को लेकर असंतोष बना हुआ है। शिक्षकों का कहना है कि सरकार ने उन्हें राज्यकर्मी का दर्जा तो दे दिया, लेकिन इसके अनुरूप मिलने वाली सुविधाएं और वेतनमान अभी तक लागू नहीं किया गया है।
शिक्षकों का आरोप है कि राज्य सरकार के चपरासी से लेकर सचिव स्तर तक के कर्मचारियों को 7वें वेतनमान का लाभ मिल रहा है, लेकिन शिक्षकों को इससे वंचित रखा गया है। इसे लेकर शिक्षक संगठनों ने सरकार से समान वेतन व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
राज्यकर्मी का दर्जा मिलने के बाद भी नहीं बदली स्थिति
बिहार सरकार ने नियोजित शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा देने की दिशा में कदम उठाया था। इसके बाद शिक्षकों को उम्मीद थी कि उन्हें सरकारी कर्मचारियों की तरह वेतन और अन्य सुविधाएं मिलेंगी।
हालांकि, शिक्षकों का कहना है कि राज्यकर्मी का दर्जा मिलने के बावजूद वेतन संरचना में बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। उनका कहना है कि जब उन्हें सरकारी कर्मचारी माना जा रहा है तो फिर 7वें वेतनमान सहित अन्य सुविधाओं का लाभ भी मिलना चाहिए।
शिक्षकों ने सरकार से की मांग
शिक्षक संगठनों का कहना है कि वे लंबे समय से समान वेतन और बेहतर सेवा शर्तों की मांग करते आ रहे हैं। उनका तर्क है कि शिक्षा विभाग में काम करने वाले शिक्षक भी सरकार की नीतियों और योजनाओं को जमीन पर लागू करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
शिक्षकों ने मांग की है कि उन्हें अन्य राज्य कर्मचारियों की तरह वेतनमान, भत्ते और सभी सुविधाएं दी जाएं।
सरकार के फैसले का इंतजार
वेतन विसंगति का यह मुद्दा अब एक बार फिर चर्चा में है। शिक्षक संगठनों की नजर सरकार के अगले फैसले पर है। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो वे आंदोलन की रणनीति पर विचार कर सकते हैं।
वहीं, सरकार की ओर से इस मामले में अंतिम निर्णय और आगे की प्रक्रिया को लेकर शिक्षकों को उम्मीद है कि जल्द कोई सकारात्मक कदम उठाया जाएगा।
शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है असर
शिक्षकों का कहना है कि वेतन और सेवा सुविधाओं से जुड़े मुद्दे सीधे तौर पर कर्मचारियों के मनोबल से जुड़े होते हैं। यदि लंबे समय तक विसंगतियां बनी रहती हैं तो इसका असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल बिहार में शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा मिलने के बाद भी 7वें वेतनमान की मांग सबसे बड़ा मुद्दा बनी हुई है।

