बेतिया में शिक्षक की बर्बरता: डकार लेने पर कक्षा-9 के छात्रों की पिटाई, शिक्षा विभाग ने मांगा स्पष्टीकरण
बिहार के बेतिया जिले से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। उच्च माध्यमिक विद्यालय ओझवलिया में कक्षा-9 के दो छात्रों को डकार लेने की मामूली बात पर शिक्षकों द्वारा बेरहमी से पीटे जाने का आरोप लगा है। इस घटना के बाद न केवल स्कूल परिसर में हड़कंप मच गया है, बल्कि अभिभावकों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश भी देखा जा रहा है।
आरोप है कि विद्यालय में पदस्थ शिक्षक सुनील कुमार पाल और संदीप कुमार राय ने कक्षा के दौरान छात्रों को डकार लेने पर पहले डांटा और फिर उन्हें जमीन पर टाइल्स पर पटक कर पीटा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, छात्रों को इस कदर मारा गया कि वे सहम गए और रोते हुए कक्षा से बाहर निकले। घटना के बाद दोनों छात्र मानसिक और शारीरिक रूप से आहत बताए जा रहे हैं।
मामले की जानकारी मिलते ही शिक्षा विभाग हरकत में आया। विभाग ने इस घटना को अध्यापक आचरण संहिता और शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act) का गंभीर उल्लंघन मानते हुए दोनों शिक्षकों से स्पष्टीकरण तलब किया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बच्चों के साथ किसी भी प्रकार की शारीरिक या मानसिक हिंसा को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया,
“प्रारंभिक जांच में आरोप गंभीर प्रतीत हो रहे हैं। शिक्षकों से जवाब मांगा गया है। संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने की स्थिति में कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।”
इस घटना ने एक बार फिर स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और अनुशासन के नाम पर की जा रही ज्यादतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अनुशासन बनाए रखने के नाम पर शारीरिक दंड देना पूरी तरह गैरकानूनी और अमानवीय है। RTE कानून के तहत स्कूलों में शारीरिक दंड पर पूरी तरह प्रतिबंध है।
छात्रों के अभिभावकों में इस घटना को लेकर भारी नाराजगी है। पीड़ित छात्रों के परिजनों ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रशासन ने मामले को दबाने की कोशिश की। एक अभिभावक ने कहा,
“हम अपने बच्चों को पढ़ने भेजते हैं, पिटने के लिए नहीं। अगर स्कूल में ही बच्चे सुरक्षित नहीं हैं, तो हम किस पर भरोसा करें?”
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने भी दोषी शिक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि ऐसे शिक्षक शिक्षा व्यवस्था के लिए खतरा हैं और इनके खिलाफ सख्त संदेश दिया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

